Fish Farming – मछली पालन का व्यवसाय कैसे शुरू करें

अगर शरीर मे प्रोटीन की कमी हो तो डॉक्टर मछली खाने की सलाह देते है क्योंकि मछली प्रोटीन का बहुत ही अच्छा स्रोत है। यही वजह है कि सिर्फ भारत ही नही बल्कि पूरे विश्व मे मछली की बहुत ही ज्यादा डिमांड रहती है। आज के समय मे मछली पालन का व्यवसाय काफी फायदे का बिजनेस माना जाता है

अगर आप भी उन लोगों में से है जो खुद का बिजनेस करके एक अच्छा मुनाफा करना चाहते है तो आप यह काम मछली पालन यानी की मत्स्य पालन करके कर सकते है। इस बिजनेस में आप मछली पालते है और उनको बेचकर पैसे कमाते है। मछली पालन के लिए आपको ज्यादा बड़ा निवेश करने की जरुरत नहीं है और इस बिजनेस में आपको सिर्फ एक बार ही निवेश करना होता है उसके बाद आप अपना खर्च इसी बिजनेस से निकालने लगते है।

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मछली पालन स्वरोजगार क्या है

Fish Farming मछली पालन का एक ऐसा स्वरोजगार है, जिसमें कम लागत में अधिक मुनाफा आप कमा सकते हैं। कम जगह में कई वैरायटी की मछलियां पाली जाती हैं और उन्हें बाजार में बेचकर लाभ कमाया जाता है। मछली प्रोटीन और विटामिन का सबसे अच्छा स्रोत होता है‌। एक बार मछली पालन का काम शुरू करने से लगातार आपकी आमदनी होती रहती है। मछली पालन के लिए रोहू, सिल्वर, ग्रास, भाकुर व नैना मछलियों जैसी वैरायटी की मछलियां अधिक पाली जाती हैं।

मछली पालन कैसे करते है

मछली पालन का व्यापार भारत के लगभग सभी राज्यों में होता है भारत में लगभग 70 प्रतिशत लोग मछली का सेवन करते है मछली पालन का व्यापार कर के भारत के ऐसे कई शहर है जहाँ के 25 प्रतिशत आबादी इसी रोजगार से अपना पालन करते है मछली पालन के व्यवसाय को हम दूसरे भाषा में fish farming भी बोलते है

भारत के लगभग आधी से ज्यादा जनसंख्या मछली खाती है और मछली पालन का व्यवसाय उन क्षेत्रों के लिए और भी फायदेमंद है जहाँ पे नदियां ,झरने,तालाब का क्षेत्र आता हो जहाँ पे इन सभी स्त्रोतों की सुविधा अच्छी मिलती है,वहां पर मछली पालन का व्यापार करना और भी आसन हो जाता है

ऐसे तो मछली पालन करने के लिए आप लोगो को कुछ जमीन और छोटे –छोटे तालाबों की भी जरूरत होती है जिसमे हम मछली को कुछ दिनों के लिए रख सकते है मछली पालन के व्यापार करने के लिए कोई ज्यादा पूंजी की जरूरत नही होती है अगर हम चाहे तो कम पूंजी में भी इसके व्यापार को चालू कर सकते है और जादा से जादा मुनाफा कमा सकते है

मछली पालन का व्यवसाय क्यों करे

आपके दिमाग में एक बात आती होगी की हम मछली पालन का व्यवसाय क्यों करे ऐसा क्या है मछली पालन के व्यापार में क्या फायदा है? मछली पालन के व्यवसाय करने से ,और ऐसे कई बाते जो लोगो के दिमाग में आ रही होंगी जो लोग पहली बार इस व्यवसाय को कर रहे होंगे या ऐसे वे लोग जिनको कोई आईडिया नही होगा मछली पालन के व्यापार का तो आपको ये बताना चाहते है की

मछली पालन का व्यवसाय भारत में जितने प्रतिशत में हो रहा है उससे कई ज्यादा प्रतिशत में दुसरे देशों में भी हो रहा है,मछली से मिलने वाले एनर्जी पौष्टिक आहार जिससे हमारे शरीर और रोगों में दवा के रूप में आने वाले कई फायेदे है इससे मछली का मांग दिन पर दिन बढ़ता ही जा रहा है आज –कल तो लोग अपने यहाँ पे ही तालब या छोटे –छोटे फार्म बनाकर ही इस व्यवसाय को बढ़ावा दे रहे है,और ज्यादा से ज्यादा फायदा कमा रहे है

यहाँ तक की मछलियों के भी कई प्रजातियां होती है,जिसके हर प्रजाति का कोई न कोई अपना ही कुछ विशेष गुण होता है ये अपने विशेष गुण के चलते बाज़ार में जादा ही प्रचलित होते है लोग इनकी मांग जादा करते है ये सभी फायदे मछली पालन के व्यवसाय को बहुत फायदे में लेकर जाता है

किस प्रजातियां ( नस्ल ) की मछलियों को पाले

अगर आप मछली पालन में घुस रहे है और आपको ज्यादा जानकारी नहीं है की  किस नस्ल की मछलियों को पालना चाहिए तो हम आपको बताते है आपको शुरुआत में टूना ,सिल्वर क्रॉप , रोहू , कॉमन क्रॉप आदि मछलियां पालनी चाहिए।

इनकी डिमांड हमेशा ही मार्किट में बनी रहती है आप मछलियों को पालने के लिए मत्स्य पालन विभाग से मछली प्राप्त कर सकते है। यह ज्यादातर शहरों में मत्स्य पालकों की मदद के लिए उपलब्ध है। यहाँ पर जाकर आप मत्स्य पालन व्यवसाय से जुड़ी और भी जानकारी पा सकते है।

मछली पालन के लिए मछलियों के प्रमुख प्रजातियां भारत में पाई जाने वाली यहाँ से पढ़े

मछलियों के प्रजातियों का चयन करने से पहले इन बातो का धयान दे

1) तालाब के माहौल में ढलने की छमता – हमलोग ने जो तालाब बना रखा है मछली पालन के लिए वो तालाब कैसा है उसमे बारो महीना पानी रहता है यह सिर्फ बारिश के मौसम में पानी रहता है इस प्रस्थिति को हमें धयान में रखना होगा

2) तेज़ी से बढ़ने की छमता – हमें यह भी ध्यान रखना होगा अगर हम व्यावासिक रूप से मछली पालन कर रहे है जिस मछली की प्रजाति को हम पाल रहे है उसकी बढ़ने की छमता अच्छी होनी चाहिए अगर मछलियां की growth अच्छी नहीं होगी तो हमें मछली पालन में ज्यादा फ़ायदा नहीं हो पायेगा और अगर तालाब मौसमी है सिर्फ बारिश के टाइम में ही तालाब में पानी रहता है 12 महीना नहीं रह पाता तो हमें मछली की growth में ज्यादा ध्यान देना होगा हमें उस मछली की प्रजाति को तालाब में पालन करना होगा जिसकी growth अच्छी हो

3) तालाबों में उपलब्ध खाने को खा सकने की छमता – आम तोर पे जो 12 मिहिनो के जो स्थाई तालाब होते है उनमे सहज रूप में कुछ खाना उपलब्ध रहता है जिन्हे मछलियां कहती है और जिन्दा रहती है मगर कई मछलियों की प्रजाति ऐसे भी होती है जो तालाब में उपलब्ध खाने को नहीं कहती है इन्हे अलग से खाना देना पड़ता है इन् बातो का भी हमें धयान रखना पड़ता है

4) जल्दी बीमार न पड़ने की छमता – जिस माहौल में हम मछली को पाल रहे है उस माहौल में ढलने की छमता होनी चाहिए इस लिए ऐसी मछली का चुनाव करे जो सब वातावरण में आसानी से ढल सके और हमें ज्यादा से ज्यादा लाभ हो सके

5) बाजार में मांग और दाम – यह बहुत ही महत्वपूर्ण बात है आखिर हम मछली पालन कर क्यों रहे है व्यापार के लिए और मुनाफे के लिए अगर हम जिस मछली की पालन कर रहे है और उस मछली की बाजार में मांग नहीं है तो हमें उस मछली को पालने का कोई फायदा नहीं है हमें उन् मछलियों की पालन करना है जिसकी मांग हमेशा मज़ार में रहती है

कौन सी मछली जल्दी बढ़ती है?

मछली पालन के व्यवसाय के लिये आप रोहू , मृगल , कतला , ग्रास कार्प , सिल्वर कार्प , कामन कार्प आदि को पाला जा सकता है। ये जल्दी बढ़ती भी है। इसके अलावा फिश फार्मिंग पूर्ण रूप से उस एरिया में लोगों के खाने की पसंद पर भी निर्भर होती है। जिस जगह लोगों को जो मछलियों ज्यादा पसंद आती है उसका ही पालन करना चाहिए ताकि आपको इस व्यवसाय में लाभ प्राप्त हो और जिस प्रकार की मछलियां तालाब के पानी मे आसानी से निर्वाह कर अपने नस्ल की वृद्धि कर सके वैसी मछलियों का पालन इस व्यवसाय में करना चाहिए।

मछली के लिए आहार कैसे तैयार करें

गोबर कर छिरकाव करना – अगर जिस तालाब में आप मछली पालन कर रहे है उसमे 1 महीना पहले से ही गोबर का छिरकाव करदे तो जब हम बीज डालेंगे तो उनके लिए वह भरपूर खाना पहले से ही उपलब्ध रहती है 1 हेक्टर में आप 1000 किलो गोबर का छिरकाव कर सकते है

चोकर – मछलिओं को चोकर देना भी बहुत अच्छा होता है जब हम तालाब में बीज डालते है मछलिओं के बच्चो के मुँह के आकर बहुत छोटे होते और वह चोकर आसानी से खा सकते है और पाचा भी लेती है

पानी में रहने वाली बत्तख – हमलोग पानी में रहने वाली बत्तख भी पाल सकते है क्युकी बत्तख का जो बीट रहता है उसे मछलियां खाती है और यह भी देखा गया है जिस तालाब में बत्तख रहते है उस तालाब की मछलियों का वजन बहुत ही तेज़ी से बढ़ जाता है यह एक बहुत ही अच्छा विचार है अगर आप मछली पालन कर रहे है तो साथ में बत्तख भी पाल सकते है इसमें आपको दूगनाह मुनाफा होगा

कई व्यापारी तो मछलियों को आटा भी दिया करते है इसके छोटे-छोटे टुकड़े बना कर मछलियों को दाने के रूप में दिया करते है ऐसे कई आहार ऐसे भी जिसे हम मछलियों को प्रदान कर सकते है,जैसे जमीन से निकलने वाले केंचुए भी मछलियों को दिए जाते है इनसे मछलियों में विकास जल्दी होता है |

मछली संचयन आप अप्रैल से जून तक कर सकते है मछली संचयन के समाये में मछली का वजन 40 से 50 ग्राम और इनकी लम्बाईए 35 से 40 सेंटीमीटर होना चाहिए

मछली का बीज कितने रुपए किलो मिलता है?

आप अपने एरिया के मछली के बीज बेचने वाले दूकानदारों से संपर्क कर सस्ते दामों पर भी मछली के बीज ले सकते हैं। इसके अलावा देश के प्रत्येक जिले में मछली पालन विभाग होता है जहाँ से भी आप मछली के बीज से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकते है । इसके अलावा  मछली के बीज किसी भी हैचरी से खरीदे जा सकते है। सहारनपुर, दिल्ली , आगरा , हरिद्वार जैसे कई शहरों में आपको ऐसे हैचरी मिल जाएंगे जहाँ से आप मछली के बीज खरीद सकते है।मछली का बीज आपको बाज़ार में 85 पैसे प्रति बीज के हिसाब से मिल जाता है।

मछली को कितना खाना देना चाहिए?

जब बात मछलियों को खाना देने की आती है तो इसका आपको खासा ध्यान देना पड़ता है ताकि मछलियों में अच्छी वृद्धि हो और वे जीवित रह सके। इसके लिए आपको तालाब में मछली के बीज डालने के 3 से 4 दिन के बाद से ही पोष्टिक खाना देने की आवश्यकता है। मछलियों के अच्छे विकास के लिए खाने की क्वालिटी पर विशेष ध्यान देना चाहिए  ताकि पानी के अंदर मछलियों की नस्ल वृद्धि कर सके। एक दिन में मछलियों को कम से कम 3 बार खाना दिया जाता है।

जो लोग मछली पालन करना चाहते है उन्हें यह दिक्कत भी आता है की मछलियों को आहार कितना दे तो आज मैं आपको बताने वाला हूँ की प्रति हेक्टर कितन आप आहार मछलियों को दे सकते है

पहला 3 महीना में आपको 3 किलो दाना देना है
दूसरे 3 महीना में 8 किलो दाना देना होगा
तीसरे 3 महीने में 16 किलो दाना देना होगा 
चौथी 3 महीना में 24 किलो दाना देना होगा

मछलियां दाना कितना खाती है

जब मछलियां छोटी रहती है तो वह अपना वजन का सिर्फ 5% ही दाना खा सकती है और जैसे जैसे मछली बढ़ने लगती है और बड़ी हो जाती है तो जो उनका खाना होता है प्रतिशत में घाट जाता है वो अपने वजन का 4% ही खाना खा सकती है 

मछली पालन के लिए कितना बड़ा तालाब चाहिए?

अब अगर बात तालाब की करें तो फिश फार्मिंग यानी मछली पालन के लिए आपको कम से कम 0.2 हैक्टेयर का तालाब सही रहता है उससे कम का तालाब बनाने से मछली पालन में खास फायदा नही मिलता है इसलिए शुरुआत में इतना बड़ा तालाब तो अवश्य बनाये जहाँ आप बड़ी संख्या में मछलियों का पालन कर लाभ कमा सके।

मछली पालन के लिए तालाब की गहराई कितनी होनी चाहिए?

मछली पालन के लिए तालाब की गहराई कम से कम 7 फुट होनी ही चाहिए ताकि सभी किस्म की मछलियां आराम से संतुलित रह पाये। वैसे भी मछली पालन के व्यवसाय में एक ही तालाब के अंदर मिश्रित प्रकार की मछलियों को रखा  जाता है।  अतः पानी मे ये मछलियां अपने अनुसार संतुलन बना लेती है।

मछली को कब बाहर निकाले

मछली को बाहर तभी निकाला जाना चाहिए जब वह 1 से 1.5 किलो की हो जाए।क्योंकि अगर मछली का वजन इससे कम हुआ तो आपका नुक्सान होगा। इसलिए मछलीके इतना बड़े होने तक इंतज़ार करें।

आमतौर पर मछली 10 से 12 महीनो में इतने वजन की हो जाती है इसके बाद बाहर जाकर बेचने के लिए भी तैयार होती है पर मछली को बेचने के लिए उसको पानी से सही से निकालना भी होगा। तो मछली को पानी से बाहर निकालने के लिए जाल का इस्तेमाल कर सकते है।

एक एक करके मछली को पकड़ने में काफी समय लगेगा इसलिए मछली के बीज जो आपने अपने नजदीकी मतस्य विभाग से लिए उनको पानी में 1 साल तक डालने के बाद जाल की मदद से मछली को पानी से बाहर निकाले।इसके साथ ही मछली को जल्दी ही बाजार तक पहुंचाए। क्योंकि ज्यादा समय तक खुली जगह में रहने के कारण मछली खराब हो जाती है।

मछली पालन में कितना खर्च आता है?

मछली पालन में लागत आपकी जरुरत के हिसाब से हो सकती है। मछली पालन में होने वाला खर्च तालाब के साइज पर भी निर्भर करता है जैसे शुरुआत में आप 0.2 हैक्टेयर के तालाब से कर सकते है। इसके लिए आपको 1 लाख से 2 लाख तक खर्च करना पड़ता है और बड़े तालाब के लिए 10 से 15 लाख तक का खर्च करना पड़ सकता है। इसके अलावा अन्य खर्चे भी है जिनमें वॉटर पम्पिंग सेट, मछली पकड़ने के लिए जाल और काम करने वाले मजदूरों का वेतन आदि खर्च शामिल है।

मछली पालन से मुनाफा कितना होता है

अगर हम मछलियों से होने वाले मुनाफे की बात करे तो हम इसे ऐसे भी समझ सकते है अगर हम जमीन और मछलियों के 5000 बीज में 5 लाख का 25 प्रतिशत भी खर्च करते है और मछलियों को बड़ा होने के लिए तालाब और टैंक में रख देते है और उन मछलियों को तब निकालते जब उनका वजन लगभग 1 किलो के बराबर हो गया हो और हम हर मछली को लगभग 100 से 150 रुपय पर भी बेचते है, तो आप सोच सकते की कितना का मुनाफा हुआ है तो हम देख सकते है मछली के व्यवसाय में हमे कितना का फायदा हो सकता है |

मतस्य पालन में मुनाफा काफी अधिक है इसमें आप हर साल 4-5 लाख रुपये आसानी से कमा सकते है आप जितनी ज्यादा मछलियों को पालेंगे उतना ही ज्यादा पैसा कमाएंगे। अच्छी नस्ल और अच्छी मछलियां आपको बिजनेस में आगे पहुंचाने में काफी मददगार साबित हो सकती है इसलिए मछली को अच्छा खाना, साफ़ पानी दे।

मछली पालन के लिए लाइसेंस कौन सी लगती है?

मछली पालन के लिये आपको निम्नलिखित लाइसेंस लेने की जरूरत पड़ती है

  • आपको अपने फर्म का रेजिस्ट्रेशन करवाना पड़ता है।
  • जीएसटी नंबर लेना पड़ता है।
  • ट्रेड लाइसेंस
  • अगर आप मछली पालन व्यवसाय के लिए सरकार से  सब्सिडी लेना चाहते है तो MSME रेजिस्ट्रेशन अवश्य करवाये।
  • FSSAI लाइसेंस

अगर आप पाले गये मछलियों का विदेशों में निर्यात करना चाहते है तो IEC कोड की भी जरूरत पड़ती है।

मछली पालन के लिए ट्रेनिंग

मछली पालन के लिए सरकार द्वारा ट्रेनिंग की भी सुविधाएं हैं। भारत सरकार के मत्स्य विभाग में समय-समय पर ट्रेनिंग की सुविधाएं मिलती हैं। पशुपालन विभाग, डेयरी विभाग और मत्स्यपालन यह तीनों कृषि मंत्रालय के अंतर्गत आते हैं। सरकार रोजगार और स्वरोजगार के लिए किसानों की आय बढ़ाने और बेरोजगारों को प्रोत्साहित करने के लिए कई योजनाएं इस समय लॉन्च की है।

सरकारी मत्स्य विभाग की वेबसाइट https://dof.gov.in में समय-समय पर ट्रेनिंग की सूचनाएं आपको मिलती है। इस समय फिशिंग फार्मिंग में ब्लू रिवॉल्यूशन यानी कि नीली क्रांति के लिए सरकार प्रोत्साहित कर रही है और फिशिंग फार्मिंग को बढ़ावा दे रही है। आधुनिक तरीके से फिशिंग फार्मिंग छोटे पैमाने पर टैंक में भी किया जा सकता है। टैंक या छोटे तालाब में मछली पालन को नई तकनीक द्वारा विकसित करने की पहल भारत सरकार द्वारा की जा रही है, जिसका फायदा करोड़ों मछली उत्पादक उठा रहे हैं। भारत सरकार द्वारा सन 2018 में लगभग ₹1 लाख 85 हजार लाख रुपए फिशिंग सेक्टर में दिया है।

हरियाणा सरकार के द्वारा भी मत्स्य पालन के लिए कई ट्रेनिंग दी जाती है। 10 दिन से लेकर 15 दिन की ट्रेनिंग मछली पालन से लेकर तालाब सफाई और किस तरह बीज डाला जाए इन सब चीजों पर होती है। वेबसाइट से अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं-https://mahendragarh.gov.in/

मछली पालन के लिए लोन

मछली पालन के लिए किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए लोन दिया जाता है। कम ब्याज दरों में यह लोन स्थानीय बैंकों द्वारा भी उपलब्ध कराया जाता है। मछली पालन के लिए किराए या खुद का टैंक लगवा सकते हैं। मछली पालन करने के लिए कुल लागत का 75 परसेंट सरकार द्वारा लोन के रूप में दिया जाता है, जिसे आसान किस्तों में आसानी से भरा जा सकता है।

मछली पालन के लिए लोन पाने के लिए, अगर आप commercial aquaculture system से मछली पालन करना चाहते तो इसके लिए ₹20 लाख का लोन जिला मत्स्य विभाग से हासिल किया जा सकता है। लेकिन आपको मत्स्य पालन का प्लान (fishing farming plan) के साथ पांच लाख रुपए अपनी तरफ से इन्वेस्ट करना होगा। टैंक में मछली पालन करने के लिए भी छोटे लोन भी दिए जाते हैं। जिला मछली पालन विभाग से संपर्क कर सकते हैं।

मछली पालन में कितनी सब्सिडी मिलती है?

अगर आप भी मछली पालन का व्यवसाय करना चाहते है पर बजट की समस्या है तो घबराने की जरूरत नही है क्योंकि सरकार अब मछली पालन के लिए सब्सिडी भी देती है ताकि इस व्यवसाय को जीविका यापन के लिए सहज बनाया जा सके। इसके लिये सरकार द्वारा ” प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना” का सुभारम्भ किया गया है। इस योजना के अनुसार मछली पालक को मत्स्य पालन का प्रशिक्षण भी दिया जाता है और फिश फार्मिंग के लिये सरकार सब्सिडी भी देती है।

एक हैक्टेयर तालाब बनाने के लिए करीबन पांच लाख रुपये का खर्च आता है। इसमें सब्सिडी सरकार कुछ इस तरह से प्रदान करती है कि जिसमें 50 फीसदी केंद्र सरकार और 25 फीसदी राज्य सरकार अनुदान देती है। साधारण शब्दों में कहें तो यदि आप मछली पालन का व्यवसाय करना चाहते है तो आपको सिर्फ 25 फीसदी का ही खर्च उठाना पड़ता है।

इसके अलावा अगर आपके पास पहले से ही तालाब मौजूद है और आप इसका इस्तेमाल मछली पालन के लिए करना चाहते है तो इसमें सुधार कर मछली पालन योग्य बनाने के लिए भी केंद्र और राज्य सरकार अनुदान देती है। अनुमानन इसमें खर्च 9 लाख रुपये आती है तो मछली पालक को सिर्फ 25 फीसदी का ही खर्च लगाना पड़ता है

मछलियों का मार्केटिंग कैसे करे

ऐसे तो भारत के हर शहर में मछलियों को बेचने के लिए एक हाट लगता है जहाँ पर सिर्फ मछलियों की ही मंडी लगती है और गाँव या उनके छोटे बाज़ार में आप खुद भी मछलियों को ले जाकर बेच सकते और बढ़िया पैसा कमा सकते है गाँव के बाजार में मछलियों का अच्छा व्यवसाय होता है मछलियों के कई बड़े फार्म तो सादी या बड़े पार्टी में भी मछलियों का सप्लाई देते है और अच्छा मुनाफा कमाते है|

प्लास्टिक टैंक में मछली पालन कैसे करें

तालाब के लिए पर्याप्त जगह की कमी के कारण अब घर में भी प्लास्टिक के टैंक बनाकर मछली पालन के व्यवसाय को बढ़ाया जा रहा है। मत्स्य पालन के इस पद्धति में 100 स्क्वायर मीटर की जगह बहुत होती है। इसे आप जरूरत के अनुसार घरों की छतों पर भी रखकर मछली पालन का व्यवसाय कर सकते है। इस प्रकार के मछली पालन में दो हजार लीटर वाले प्लास्टिक टैंक को एक दूसरे के साथ जोड़ दिया जाता है।

इस पद्धति में आप 1 से लेकर 5 टैंकों के इस्तेमाल कर मिश्रित मछली पालन भी कर सकते है। पहले वाले टैंक में जासर मछली की फिंगरलिंग यानी तीन इंच वाली सीड डाली जाती है। इससे निकलने वाले पानी को दूसरी वाली टैंक में जमा किया जाता है। इस टैंक में देसी कार्प यानी कतला , रोहू और मृगल की फिंगरलिंग सीड डाली जाती है। तीसरे टैंक में विदेशी कार्प यानी ग्रास , सिल्वर, कामन की फिंगरलिंग सीड डाली जाती है। इसके बाद वाली टैंक का इस्तेमाल फ्रेश वॉटर के लिये किया जाता है तो इस तरह से प्लास्टिक टैंक में भी मछली पालन का व्यवसाय किया जाता है।

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