मछली पालन के लिए मछलियों की प्रजातियां की जानकारी Fish Breeds in India

मछली पालन के लिए मछलियों की प्रजातियां की जानकारी – मछली पालन के लिए बहुत ही जरूरी होता है की मछलियों की प्रजाति के बारे में जानकारी हासिल करना की किस प्रजाति की मछलियां पालन कर के हम ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमा सके वैसे तो मछलियों की कई प्रजाति भारत में पाए जाती है हमें उस मछली की प्रजाति की पालन करना है तो हमारे वातावरण में आसानी से ढल सके और जिसकी बढ़ने की छमता अच्छी हो

आज में आप लोगो को मुख्य रूप से जो मछलियों की प्रजाति लोग मछली पालन के लिए पसंद करते हैं उसके बारे में बताने जा रहा हूं मैंने आपने पिछले लेख में मछली पालन कैसे किया जाता है इसका पूरा तरीका मैं ने बताया था आज मैं आपको मछलियों के अलग अलग प्रजाति के बारे में बताने जा रहा हूं किस नस्ल की मछलियां पालन कर के अपना बिजनेस बढ़ा सकते हैं और ज्यादा से ज्यादा प्रौफिट कामा सकते हैं

मछलियों के प्रमुख नस्ले भारत में पाई जाने वाली :

1) रोहू मछली – यह नस्ल की मछलियां भारत में बहुत ही लोकप्रिय मछलियों में से एक मानी जाती है यह मछलियां दक्षिण एशिया के नदियों में पाई जाती है यह कार्प परिवार की मछली की एक महत्त्वपूर्ण प्रजाति है

यह नस्ल की मछली रोहू, रुई, या रोहो के नाम से भी जाना जाता है यह मछलिया ज्यादा तर पानी में पैदा होने वाले पौधे यह वनस्पति को खाकर अपना गुजारा कर लेती है इनकी लम्बाई 1 मीटर तक होती है

रोहू मछलियां दूसरे साल के दौरान प्रजनन के लिए रेडी हो जाती है अप्रैल-सितम्बर के समाये में यह अंडे देती है यह नस्ल की मछलियां स्वाभाविक रूप से नदियों में और बंडों में विशेष परिस्थितियों में पैदा होती है

मछली पालन के लिए यह प्रजाति की मछली उत्पादित बीज मौसमी या बारहमासी अनावश्यक तालाबों में आसानी से पाला जा सकता है यह मछलियां एक साल में 1 kilo से ज्यादा बढ़ जाती हैं

2) कतला मछलियां – यह नस्ल की मछलियां भारतीय प्रमुख कार्प प्रजाति मानी जाती है यह सब से तेज़ी से बढ़ने वाली मछली की नस्ल है यह मछलिया मछली पालन करने के लिए बहुत ही ज्यादा लाभदायक माना जाता है

यह नस्ल की मछली भारत,पाकिस्तान,बांग्लादेश में बहुत ही ज्यादा लोकप्रिय है हमारे भारत में इसे भाकुरा नाम से भी पहचाना जाता है इसका शरीर चौड़ा,सिर लम्बा और पंख काले रंग की होती है यह अपना खाना पानी के ऊपरी सतह से खाती है

कतली मछलियां मानसून के समाये प्रजनन के लिए तैयार हो जाती है यह साल में एक बार अंडे देती है और यह अपनी शरीर की वजन के हिसाब से 75000 से अधिक अंडे देती है
यह मछलियां मानसून के मौसम में नदियों में स्वाभाविक रूप से नस्लों और बंडों में नियंत्रण की स्थिति के तहत भी पैदा हो सकती है

इन मछलियों को आप मछली पालन के लिए साफ और गहरे पानी के टैंकों और तालाबों में आराम से पल सकते है इन मछलियों का वजन एक साल में 1 से 1.5 किलो तक बहुत ही तेज़ी से बढ़ जाता है

3) सिल्वर कार्प – सिल्वर कार्प मछलियां मूल रूप से दक्षिण और मध्य चीन में पाई जाने वाली नस्ल में से है मगर अब यह मछलियां हमारे भारत में भी उपलब्ध है यह मछलियां सिल्वर रंग की होती है यह अपना भोजन पानी की उपरि सतह में आकर करती है

यह पानी में उगने वाले पौधे और सड़े गले जाल तेल केक और चावल की मिश्रण खाकर आसानी से पचा लेती है यह मछलियां तालाब में अच्छे प्रजनन नहीं करती मगर इन्हें hypophysation के तकनीक से मानसून में इन्हें तालाबों में प्रजनन करवाया जाता है

यह मछलियां को चीन में परिपक्व होने में लगभग 2-4 साल लग जाता हैं, जबकि भारत में यह 2 साल के अंदर ही परिपक्व हो जाती है यह मछली में यह खास बात है की यह सब प्रजाति की मछली से पहले परिपक्व होती है और यह मई और जून के महीने में अंडे देने के लिए तैयार हो जाती है यह अपनी शरीर की वजन के हिसाब से 90,000 से 1 लाख तक अंडे देती है
तालाब से मछली पालन करने के एक साल में अंदर इनका वजन 1 से 1.5 किलो हो जाता हैं

4) कॉमन कार्प – यह प्रजाति की मछली विशेष रूप से चीन के मूल निवासी कार्प है मगर अब यह मछलियां दुनिया भर में सबसे पालतू और खेती वाली कार्प प्रजातियां मानी जाती है यह मछलियां हमेशा अपने भोजन की तलाश में तालाब के नीचे तल को खोद देता है।

इसकी तालाब के नीचे खोदने की यह आदत तालाबों की उत्पादकता को बनाए रखने में काफी मदद करती है और इसलिए अन्य मछलियों की प्रजातियों के साथ कॉमन कार्प को तालाब में पलना बहुत ही फायदामंद होता है

यह मछलियां ज्यादा तर पानी के नीचे गहराई में रहने वाली प्रजाति है जो की सड़ी गली फल और पौधे खाकर अपना गुजारा कर लेती है मछली पालन के दौरान यह एक साल के अंदर ही 1 किलो से ज्यादा वजन इनका हो जाता है

इन मछलियों का रंग गहरा सुनहरा पीली होती है और इनकी लम्बाई 10 से 14 इंच तक होती है यह मछलियां साल में 2 बार अंडे देती है मार्च से अप्रैल और सितम्बर से अक्टूबर में अंडे देती है यह मछलियां अपने शरीर की वजन के हिसाब से 85,000 से 95,000 तक अंडे देती है मछली पालन के लिए एक एकड़ में 20 हज़ार कॉमन कार्प पाला जा सकता हैं

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