गोबर गैस प्लांट कैसे लगाए पूरी जानकारी

आज कल तकनीक में होने वाले विकास द्वारा हमारे जीवन मे बहुत सारी आसानियाँ हो गयी है, जीवन के प्रत्येक एरिया में नई नई तकनीकों को देख सकते है, जो हमारे जीवन और लाइफ स्टाइल को पूरी तरह से अपडेट और बदल चुका है, उनमे से ही एक है गोबर गैस, गाये के गोबर को इस्तेमाल करके नई तकनीक का उपयोग व, वैज्ञानिक दृष्टिकोण के द्वारा गोबर गैस बनाना,जिसके द्वारा हम अपनी जीवन को आसान बनाने का काम कर रहे है,  तो आज हम गोबर गैस के विषय मे जानेंगे, जिसमे निम्न जानकारियां होंगी-

गोबर गैस क्या है, गोबर गैस प्लांट क्या होते है, गोबर गैस प्लांट कैसे शुरू करे, गोबर गैस प्लांट कैसे लगाए, गोबर गैस से बिजली कैसे बनाये, गोबर गैस में कौन सी गैस होती है, गाये के गोबर से कौन सी गैस निकलती है, गोबर गैस कितने दिन में बनती है,बायोगैस घर पर कैसे बनाये, गोबर गैस प्लांट बनाने की विधि क्या है, मिनी गोबर गैस प्लांट लागत(cost) कितनी होती है,गोबर गैस सिलेंडर में भरने की विधि क्या है, गोबर गैस प्लांट में कितनी लागत(investment) लगती है, गोबर गैस प्लांट सब्सिडी क्या है, गोबर गैस प्लांट में कितना मुनाफा है।

गोबर गैस क्या है

गोबर, कूड़े कचड़े, घरों के अपशिष्ट(waste material)फसलों के waste  अपघटित(decomposition) होकर एक प्रकार की गैस बनाते है, इसी गैस को गोबर गैस या बायोगैस कहते है, ये गैस मुख्यतः गोबर के द्वारा बनाई जाती है, व ये गैसे हमारे पर्यायवरण को बिना किसी धुँए व प्रदूषण के बना ली जाती है, जिसका इस्तेमाल आज के समय मे बहुत ज्यादा बढ़ गया है।

इस गैस को मुख्य रूप से दो तरह से इस्तेमाल करते हैं-

  • घरों में बिजली के रूप में
  • ईंधन के रूप में

इसके उपयोग को देखते हुए लोग इसका इस्तेमाल करना चाह रहे हैं।

इन गैसों को बनाकर अगर किसी तरह से मुनाफा कमाया जाए तो यही गोबर गैस बिज़नेस कहलाता है, जिसकी मांग आज वर्तमान में बहुत बढ़ गयी है।

गोबर गैस प्लांट क्या है

गोबर गैस जिन प्लांट द्वारा बनाये जाते हैं, उन्हें ही गोबर गैस प्लांट कहते है,इन प्लांट के द्वारा ही गोबर गैस के बिज़नेस चलाये जाते है, जिसमे इन गैसों को ईंधन व बिजली के रूप में इस्तेमाल कर मुनाफा कमाया जाता है।

इन प्लांट में गोबर गैस बनाने वाली मशीने, slury टैंक, गैस कंप्रेसर, गैस प्यूरीफायर, व अन्य पाइप व मोटर मौजूद होती है।

गोबर गैस प्लांट कैसे शुरू करे

किसी भी प्लांट को चलाने व शुरू करने के लिए उससे सम्बंधित सभी जानकारियां ले लेनी चाहिए, उसके बाद ही अपने बजट के हिसाब से प्लांट पर इन्वेस्ट करना चाहिए।

गोबर गैस प्लांट को शुरू करने के पद निम्न है-

  • प्लांट के लिए जमीन चयन
  • प्लांट के लिए जरूरी दस्तावेज बनवाये
  • प्लांट में कमर्शियल बिजली ले
  • प्लांट हेतु मशीनों को खरीदे
  • प्लांट का पूरा सेटअप कराए
  • प्लांट में गोबर की सप्लाई के लिए किसी किसान व गोबर की सप्लाई वाले से सम्पर्क करें
  • गोबर गैस बनाये और मुनाफा कमाए

1) गोबर गैस के लिए जमीन चयन

किसी भी बिज़नेस के लिए प्लांट लगवाने के लिए हमे सबसे जरूरी है उसके लिए जमीन लेना, और जमीन हमेशा प्लांट की साइज के आधार पर होती है, व जमीन ऐसी जगह लेने की कोशिश करे, जहा गोबर की सप्लाई में दिक्कतें न हो, आप अपने प्लांट को आसानी से चला सके।

2) प्लांट के लिए जरूरी दस्तावेज बनवाना

किसी भी प्लांट को शुरू करने के जरूरी पदों में ये भी एक है, जिसके बिना आपके प्लांट चल ही नही सकते, 

इस प्लांट के लिए कुछ दस्तावेज लगते है-

  • Udhyog रजिस्ट्रेशन(किसी भी बिज़नेस के लिए इसका होना अनिवार्य है)
  • प्रदूषण लाइसेंस (इसमे ये तय किया जाता है, की आपका प्लांट धुँए, व प्रदूषण से जुड़े कोई काम नही करते हैं)

व अन्य प्लांट से सम्बंधित दस्तावेज जैसे जमीन के दस्तावेज,  कमर्शियल बिजली के दस्तावेज जरूरी होते है।

इसके अलावा अन्य भी जरूरी दस्तावेज लग सकते हैं, जिसकी जानकारी प्लांट से जुड़े लोग, उद्योग विभाग के द्वारा प्राप्त की जा सकती है।

3) प्लांट के लिए कमर्शियल बिजली कनेक्शन ले

किसी भी ऐसे उद्योग जहा बिजली की मशीनों का काम ज्यादा है, उन प्लांट को शुरू करने के लिए कमर्शियल बिजली कनेक्शन लेने जरूरी होता है, जिससे बिजली की खपत कम हो सके।

इस तरह के कनेक्शन में नार्मल बिजली से बिल कुछ कम आता है।

4) प्लांट के लिए मशीनों को खरीदे

किसी भी प्लांट में काम को अच्छे व बेहतर तरीके से करने के लिए मशीनों का सेटअप कराया जाता है, जिससे ज्यादा से ज्यादा कम समय मे कर बिज़नेस से मुनाफा प्राप्त किया जा सके।

गोबर गैस प्लांट के लिए निम्न मशीनें इस्तेमाल की जाती है-

  • Road weighbridge for weight
  • Slurry preparation tank
  • Digester of double membrane
  • Roof top and four submersible agitator
  • Agitator and pumps
  • Purification system
  • Membrane compressor
  • Receiver
  • Gas storage tank
  • Overflow tank
  • Field hand tools
  • Pressure regulator

ये सभी जरूरी मशीनों के साथ एक गोबर गैस प्लांट का सेटअप करके वहा पर ईंधन व बिजली के लिए गोबर गैस का प्रोडक्शन किया जाता है।

5) प्लांट के लिए पूरा सेटअप करना

गोबर गैस प्लांट का पूरा सेटअप तैयार कर जिसमे मशीनें, फर्नीचर, आफिस, बिजली कनेक्शन, वायरिंग, व अन्य जरूरी चीज को सेटअप कर प्लांट को शुरू किया जाता है, जिसमे तकरीबन 2 साल तक लग सकता है।

6) प्लांट में गोबर की सप्लाई के लिए किसी किसान व गोबर की सप्लाई वाले से सम्पर्क करें

गोबर गैस के बनाने के लिए प्लांट में किसानों व गोबर की व अन्य अपशिष्ट की सप्लाई करने वालो से सम्पर्क कर अपशिष्ट को प्लांट तक मंगवाते है, फिर उसके द्वारा गोबर गैस बनाकर उसे टैंक में भर लिया जाता है।

7) मुनाफा

टैंक में तैयार गोबर गैस या बायोगैस का इस्तेमाल सिलेंडर भरके ईंधन के रूप में व बिजली के लिए जेनेरेटर से कनेक्ट कर ग्राहको से मुनाफा कमाते है, व इस बिज़नेस को बढ़ाते है।

गोबर गैस से बिजली कैसे बनती है

गोबर गैस द्वारा बिजली के रूप में इस्तेमाल कर बहुत से लोगो का बिजली के बिल से छुटकारा दिलाया जा रहा।

गोबर गैस से बिजली बनाने की विधि या तरीका-

  • प्लांट तक सप्लाई किये हुए गोबर को सबसे पहले road weigh bridge के द्वारा weight करके देखा जाता है, और प्रोडक्शन के अनुसार उतना ही गोबर लिया जाता है।
  • इस नापे हुए गोबर को slury टैंक में डाल कर पानी और digester से आये घोल के साथ agitator की मदद लेकर उसे मिक्स किया जाता है, जिससे एक अच्छा घोल तैयार हो।
  • Slury बनाने वाले गड्डे में motor और agitator पहले से होता है, यहा motor की मदद से slury को digester तक भेज दिया जाता है, यह digester को लगभग 5000 cubic meter व उससे बड़ा भी प्लांट की साइज के अनुसार हो सकता है, जिसके ऊपर double membrane roof होती है, और इस digester के अंदर 4 submersible  agitator लगाए जाते है, जिसके द्वारा ज्यादा से ज्यादा और बेहतर गोबर गैस प्रोडक्शन किया जा सके, व इसके द्वारा ही यूनिफार्म बैक्टीरिया का डिस्ट्रीब्यूशन किया जाता है, जिससे ज्यादा से ज्यादा मीथेन को प्रोडक्शन हो सके।
  • इसके बाद digester में बने roof  के द्वारा raw material (जिनका इस्तेमाल गोबर गैस बनाने में किया गया) उन्हें purification system में आती है।
  • Purification system CO2 के absorption  कर CH4 को pure अलग  करने का काम करता है, जिससे CO2(carbon die oxide) को CH4 (methane) से अलग कर उसे कंप्रेसर की मदद से सिलेंडर में भर सकते है।
  • तैयार methane को कंप्रेसर से होकर एक पाइप के द्वारा जेनेरेटर जो बायोगैस से चलता है, उससे जोड़ देते है, जिससे बायोगैस व गोबर गैस के द्वारा बिजली पूरे प्लांट में जरूरी चीज़ों में इस्तेमाल की जा सकती है।

अतः इस प्रकार गोबर गैस द्वारा बिजली बनाकर लोग अपने बिजली बिल की बचत कर रहे है।

गोबर गैस में कौन सी गैस होती है

गोबर गैस में (methane) मीथेन गैस होती है, जिसका इस्तेमाल लोग ईंधन व बिजली के रूप में कर बचत और मुनाफा कमाते है।

गाये के गोबर से कौन सी गैस निकलती है

गाये के गोबर से मीथेन गैस (CH4) गैस निकलती है, जिसे बायोगैस व गोबर गैस कहा जाता है।

गोबर गैस कितने दिन में तैयार होती है

गोबर गैस बनना अपशिष्टों के ऊपर होता है, कुछ अपशिष्ट जल्दी गैस बनाते है, तो कुछ थोड़ा देर।

सामान्यतः गोबर गैस बनने में 10 से 30 लगते है, लेकिन कुछ अपशिष्ट के जिसमे मेथेनॉइक क्वालिटी के आधार पर लगभग न्यूनतम 5 दिन से 90 दिन भी लग सकते है।

बायोगैस घर पर कैसे बनाये

गोबर गैस प्लांट में बनाने के अलावा घर पर भी बनाई जा सकती हैं, आज के समय मे लोग अपने घर की बिजलियों की खपत कम करने और ईंधन के रूप में इस्तेमाल करके बचत करते है।

घर मे प्लांट के लिए जरूरी चीज-

  • दो इनलेट(ज्यादा कैपेसिटी के लिए)
  • एक आउटलेट
  • दो ड्रम जिसमे digester होते है
  • दोनों ड्रम को जोड़ने वाला कनेक्टर
  • गैस होल्डर
  • गोबर व अपशिष्ट

बायोगैस घर पर बनाने के पद-

  • बायोगैस बनाने के लिए सबसे आसान है, घरों में दो ड्रम ले , जिनमे digester  होते है, एक छोटा ड्रम और बड़ा ड्रम ले, और दोनों में इनलेट का सिस्टम देते है, जिससे कैपेसिटी को बढ़ाया जा सके, व एक आउटलेट भी होता है, जहा से अपशिष्ट बाहर निकलते है।
  • दोनो ड्रम के इनलेट जहा से गोबर व अपशिष्ट को डालते है, वही ड्रम से जुड़े होते हैं, तो इनलेट से गोबर व अन्य अपशिष्ट पानी के साथ डालेंगे, जो 1:1  के अनुपात में हो, व ड्रम (जिसके अंदर digester  होते है )के अनुसार ही हो।
  • इनलेट में गोबर डालते ही वह ड्रम में जाता है, उसके अंदर digester होते है, इसी ड्रम में गोबर सड़ता है, व गैस बनकर ड्रम को ऊपर की तरफ धकेलता है, और इन ड्रम में गैस होल्डर लगे होते है, जिन्हें कनेक्टर से जोड़कर बनी हुई गैस को आगे घर मे सप्लाई कर दी जाती है।

मिनी गोबर गैस प्लांट लागत (cost) कितनी होती है

मिनी गोबर गैस प्लांट की सभी सामान और raw material  को लेकर 

नैनो गैस प्लांट या मिनी प्लांट को बायोटेक इंडिया केरल स्थित है, जिसने एक आसान तरीका निकाला।

इस बायोगैस के दो मॉडल है, एक 45 लीटर व दूसरा 160 लीटर

45 लीटर मॉडल 10 से 20 लीटर के करीब गैस प्रोडक्शन करता है,  160 लीटर वाला मॉडल 30 से 50 लीटर गैस प्रोडक्शन करता है।

45 लीटर मॉडल की कॉस्ट 6750 के लगभग है।

160 लीटर मॉडल की कॉस्ट 9950 के लगभग है।

इस तरह के मिनी मॉडल लोगो को ईंधन के खर्च को बचाने में मददगार होते है।

व ऐसा ही मिनी मॉडल 6000 से 10000 के करीब तक कॉस्ट लेते है, जिसके द्वारा सालो फ्री में ईंधन के रूप में गोबर गैस इस्तेमाल किया जा सकता है।

गोबर गैस सिलेंडर में भरने की विधि क्या है

गोबर गैस सिलेंडर में ही भरकर लोगो तक सप्लाई की जाती है,

 इसके निम्न पद हैं-

  • गोबर को मापकर slury tank में agitator की मदद से मिक्स करना
  • वहां से मोटर के द्वारा पाइप से होते हुए roof membrane जहा 4 submersible digester के द्वारा गैस बनती है।
  • वहां से purification सिस्टम में जाकर CH4 को अलग कर कंप्रेसर की मदद से सिलेंडर में भर दिया जाता है जिसे ईंधन के रूप में आगे इस्तेमाल किया जाता है।

गोबर गैस प्लांट में कितनी लागत (investment) लगती है

गोबर गैस प्लांट की लागत उसके साइज के आधार पर होती है, जितना छोटा प्लांट उतना कम लागत, व जितना बड़ा प्लांट उतनी ज्यादा लागत।

अलग अलग क्यूबिक मीटर के हिसाब इसकी लागत होती है जो कीमत में 1000 क्यूबिक मीटर प्लांट के लिए 1 करोड़ व 5000 के करीब वाले प्लांट में लगभग 6 करोड़ लागत लगती है।

2000 क्यूबिक मीटर वाले प्लांट 15000/मीटर क्यूब

5000 क्यूबिक मीटर से बड़े प्लांट 10000/मीटर क्यूब

प्लांट के आधार पर इनके लागत भी घटती बढ़ती रहती है, जिससे उसमे raw material, कनेक्शन ,setup सब करने में लागत लगती है।

सामान्यतः गोबर गैस प्लांट लागत –

प्लांट साइजलागत
1 क्यूबिक मीटर20 से 25000 लगभग
2 क्यूबिक मीटर30 से 32000 लगभग
3 क्यूबिक मीटर40000 के लगभग
4 क्यूबिक मीटर45000 के लगभग

इस प्रकार लोग गोबर गैस पर इन्वेस्ट कर सालो मुनाफा कमा सकते है।

गोबर गैस सब्सिडी

गोबर गैस पर सरकार द्वारा मिलने वाला अनुदान ही सब्सिडी होता है।

पंचायती राज निदेशालय के आदेश के अनुसार Up में ग्राम पंचायत द्वारा लोगो का चयन किया जा रहा है, जिसमे उनको सब्सिडी प्रदान की जाएगी जो 40 % खर्च खुद करे, व 60% सरकार द्वारा भुगतान किया जाएगा।

योग्यता

  • Up का नागरिक।
  • 13 फिट डोम व 25 फिट जगह ज्यादा के साथ हो।
  • 5 से अधिक मवेशी व जानवर होना आवश्यक है।
  • 50kg प्रतिदिन गोबर के अनुसार 18.25 टन गोबर वार्षिक में व्यवस्था अवश्य होनी चाहिए, जिससे जगह की कमी न हो।

सब्सिडी में-

1st phase में – 40000 सब्सिडी

2nd phase में-  30000 सब्सिडी 

सरकार द्वारा भुगतान करने व मदद करने की बात कही गयी है।

जिनके द्वारा लोग सब्सिडी की मदद से घरों में बिजली व ईंधन में पैसे के खर्च को बचत कर पा रहे, व उसके अतिरिक्त मुनाफा भी कम रहे।

गोबर गैस बिज़नेस में मुनाफा कितना है

इस बिज़नेस में मुनाफा प्लांट के साइज के अनुसार है, जितना ज्यादा प्रोडक्शन एक दिन में होगा उतना ही मुनाफा होगा, छोटे गोबर गैस के प्लांट से बहुत से किसान महीने का 20000 तक कमा रहे, व इसके अलावा बड़े बड़े प्लांट जिनमे ज्यादा लागत लगाकर बनाया गया, उनमे रिकवरी के बाद लगभग लाखो रुपये का मुनाफा है, जो सालाना करोड़ तक भी जाता है।

इस प्रकार हमने गोबर गैस से जुड़े जानकारी देने का प्रयास किया जिससे लोग इसके विषय मे जानकर अपने घरों में होने वाले खर्चो को कम कर सकते है, व कुछ लोग इससे अच्छा मुनाफा भी कमाकर अपने भविष्य को बेहतर बना सकते है।

Thanks

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