कोचिंग सेंटर बिजनेस कैसे शुरू करें पूरी जानकारी | Coaching Center Business Ideas in Hindi

Coaching Center/Institute कैसे खोले और रजिस्ट्रेशन कैसे करे पूरी जानकारी

आजकल स्कूल जानेवाले सभी छात्रों के माता पिता को यह चिंता जरूर सताती है कि उनका बच्चा अच्छी पढ़ाई कर रहा है या नहीं। और स्कूल के समय के बाद भी उन्हें कैसे पढ़ाई में संलग्न किया जाए जिससे कि उनके मार्क्स में बढ़ौतरी हो। ऐसे में उनकी तलाश शुरू हो जाती है एक अच्छे कोचिंग इंस्टीट्यूट की जहां से पढ़कर उनके बच्चों की अच्छी पढ़ाई हो सके। तो अगर आप भी ऐसे किसी कोचिंग इंस्टीट्यूट शुरू करने के बारे में सोच रहे हैं, आप भी शिक्षा के क्षेत्र में कैरियर बनाना चाहते हैं, और अगर आपमें भी बच्चों को अच्छे से सिखाने का हुनर है लेकिन आप किसी स्कूल में काम नहीं करना चाहते तो आपको कैरियर बनाने के लिए कोचिंग इंस्टीट्यूट एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। लेकिन इसके लिए कुछ बुनियादी बातों को याद रखना बहुत जरूरी होता है। कोई भी कोचिंग इंस्टीट्यूट शुरू करने से पहले आपको बहुत सारी बातों के बारे में सोचने पड़ता है और उसके हिसाब से अपना अगला कदम रखना पड़ता है।

आज हर बच्चा चाहे यह कितने भी अच्छे स्कूल में ही न पढ़ रहा हो, वह ट्यूशन अवश्य ही पढ़ रहा होगा इसलिए आज कोचिंग सेंटर की संख्या भी दिनोदिन बढ़ती जा रही है, साथ ही इनमे प्रतिस्पर्धा की भावना भी बढ़ रही है तो यदि आप भी ऐसे ही बिजनेस के बारे में सोच रहे है, तो आपकी जानकारी को बढ़ाने के लिए कोचिंग सेंटर बिजनेस की विस्तार से चर्चा करते हैं 

कोचिंग सेंटर शुरू करने के लिए अच्छी जगह का चुनाव –

कोचिंग सेंटर को शुरू करने के लिए सबसे पहली और अहम बात होती है एक अच्छी और उपयुक्त जगह का चुनाव। कोचिंग सेंटर शुरू करने से पहले इस बात की पुष्टि करलें कि कोचिंग इंस्टीट्यूट एक साफ सुथरे माहौल में होना चाहिए, भीड़भाड़ वाले इलाके दूर, और बच्चों के आने जाने की दृष्टि से उपयुक्त स्थान पे होना चाहिए। साफ सुथरे माहौल से आपके इंस्टीट्यूट की शोभा बढ़ेगी। बच्चों का और उनके माता पिता का ध्यान इंस्टीट्यूट की तरफ आकर्षित होगा। भीड़भाड़ वाले इलाके से दूर होने की वजह से और शांत वातावरण में पढ़ने से बच्चों का पढ़ने में और शिक्षकों का पढ़ाने में ध्यान बना रहेगा। 

फिर यदि आपकी कोचिंग के पढ़ाने का तरीका आदि उन्हें पसंद आता है तो वह सब अपने मित्र को भी बताएंगे और इस प्रकार से आपकी कोचिंग सेंटर की मार्केटिंग होगी पर यदि एक नई कोचिंग हो वो भी काफी अलग थलग जगह पर हो तो छात्र वहाँ जाने से पहले कई बार सोचेंगे पर यदि एक बार किसी भी कोचिंग संस्थान का नाम प्रसिद्ध हो जाये तो फिर इस बात से फर्क नही पड़ता है कि वह किस जगह पर स्थित है छात्र स्वयं ही उस कोचिंग को खोजते हुए वहां तक पहुँच जायेगे 

अनुभवी लोगों की सलाह –

कोचिंग सेंटर शुरू करने से पहले उस क्षेत्र के अनुभवी लोगों की सलाह लेना कभी भी फायदेमंद हो सकता है। उनके अनुभवों से सीख लेकर हम अपने कोचिंग सेंटर को और बेहतर बना सकते हैं। और उनके काम करने के तरीके देख कर हमें अपने काम करने की दिशा निश्चित करने में आसानी मिलती है।

विषयों का चयन –

आप कोचिंग इंस्टीट्यूट में कौनसी कक्षा को सिखाएंगे और कौनसे विषय सिखाएंगे यह निश्चित करलें। एकसाथ स्कूल और कॉलेज दोनों के लिए क्लासेस शुरू करने से अच्छा है कि पहले छोटी शुरुवात करें। पहले सिर्फ स्कूल के बच्चों के लिए कोचिंग शुरू करके फिर जब धीरे धीरे सफलता मिलने लगे तो फिर बाद में दूसरे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। और इस बात का भी research करलें कि ऐसे कौनसे विषय हैं जिनमें छात्रों की रुचि है लेकिन वह विषय सिखाने वाले लोग काम है। ऐसे विषयों का भी चयन किया जा सकता है।

कोचिंग सेंटर खोलने के क्या तरीके हैं 

यदि आपने मन बना लिया है कि आप कोचिंग सेंटर ही खोलना चाहते है, और अपने यह भी निर्धारित कर लिया है, की आप किस क्लास के बच्चों को ट्यूशन देंगे तो इसके बाद बारी आती है योजनाओं के क्रियान्वयन की इसके लिए आपके पास दो तरीके होते है पहला और सबसे आसान तरीका होता है कि आप अपने घर मे कोई एक कमरा चुन लें, और वहां पर कोचिंग की क्लासेस शुरू कर सकते है यहाँ पर यह भी कर सकते है कि यदि आपके घर पर उपयुक्त माहौल नही है ट्यूशन पढ़ाने लायक, तो आप कही पर कोई एक कमरा किराए पर ले सकते हैं वहां पर आप बच्चों को ट्यूशन पढ़ा सकते हैं 

दूसरा तरीका यह है कि आप अपने शहर के किसी प्रसिद्ध कोचिंग संस्थान की फ्रैंचाइज़ी ले सकते है इस तरह का मॉडल फ्रेंचाइजी मॉडल कहलाता है फ्रेंचाइजी मॉडल एक ऐसा मॉडल होता है, जिसके द्वारा आप कुछ पैसे देकर किसी कोचिंग संस्थान से यह अनुमति पा लेते है कि हम उस कोचिंग संस्थान के नाम की कोचिंग खोल सकते हैं

यदि इन दोनों तरीको में बेहतर तरीके की बात की जाए, तो यहाँ इस दोनों तरीको के कुछ फायदे तो कुछ नुकसान भी है जैसे यदि आप खुद की कोचिंग क्लासेस खोलते है तो आपके खर्चे कम रहेंगे, क्योंकि इधर पर आप अपने हिसाब से अपने खर्चे को नियंत्रित कर सकते हैं वही जब आप फ्रेंचाइजी मॉडल का चुनाव करते हैं तो आपके खर्चों पर आपका नियंत्रण नही रहता है

वह कोचिंग संस्थान आपसे जितने पैसे की मांग रखेगी, आपको उस कोचिंग संस्थान की फ्रेंचाइजी हासिल करने के लिए देना होगा अधिकतर मामलों में यह रकम ज्यादा ही होती हैं पर इसका आपको जो सबसे बड़ा फायदा मिलेगा वह यह है कि आपको अपनी कोचिंग की मार्केटिंग में ज्यादा वक्त और पैसा नही व्यय करना पड़ेगा क्योंकि उस कोचिंग संस्थान की एक पहचान पहले से ही बनी हुई है जिस वजह से विद्यार्थी खुद ही उस कोचिंग की तरफ आएंगे 

उपयुक्त और well qualified शिक्षकों का चयन –

जहां एक अच्छा शिक्षक आपके इंस्टीट्यूट को बुलंदियों तक पहुंचा सकता है वहीं एक बुरा शिक्षक उसे डूबा भी सकता है। इसलिए अपने कोचिंग इंस्टीट्यूट में शिक्षक नियुक्ति से पहले उनके शैक्षणिक स्तर कि और बाकी बातों कि जांच कर लेना बहुत आवश्यक होता है। उनके सिखाने के तरीके पे निर्भर करता है कि आपके इंस्टीट्यूट में बच्चों के एडमिशन बढ़ेंगे या कम होंगे।

उचित शैक्षणिक साधनों का इस्तेमाल –

जब भी कोई शिक्षक अच्छे साधनों का इस्तेमाल अपने अध्यापन में करता है तो उसकी सिखाए हुई बात का असर (impact) बहुत अच्छा होता है। उचित साधनों के इस्तेमाल से जहां बच्चों का अध्यापक के सिखाने की तरफ ध्यान और आकर्षित होता है, वहीं उनकी उत्सुकता देख कर एक शिक्षक भी और जोश में उन्हें पढ़ा सकता है। आप इसमें पाठयपुस्तक के अलावा overhead projectors, PPts, Live Demonstrations जैसे साधनों का इस्तेमाल करके अपने अध्यापन को और बेहतर बना सकते हैं।

कम फीस से शुरुवात करें –

शुरुवाती दौर में यह जरूरी है कि आप भले ही कितना ही अच्छा पढ़ाने का दावा करें लेकिन बच्चों के मातापिता का ध्यान आपके इंस्टीट्यूट की तरफ आकर्षित करने के लिए कम फीस से शुरुवात करें। और जैसे जैसे आप सफलता हासिल करने लगें तो फिर आप फीस बढ़ाने के बारे में सोच सकते हैं। याद रखिए। किसी भी बड़ी चीज की शुरुवात हमेशा छोटी चीज से ही होती है। और जैसा कि English में एक कहावत है कि struggle in silence, and let your success make the noise। तो पहले यह जरूरी है कि आप अपने टैलेंट के जोर पर लोहा मनवाएँ।

अच्छी शिक्षा में कमी नहीं आनी चाहिए –

कम फीस लेने का यह मतलब बिल्कुल नहीं की आप क्वालिटी से समझौता करें। कुछ शिक्षक ज्यादा फीस तो ले लेते हैं लेकिन उस स्तर का शिक्षण नहीं दे पाते हैं जिससे बच्चों का शैक्षणिक और उनके मातापिता का आर्थिक नुकसान होता है। लेकिन आपको इस बात को हमेशा याद रखना चाहिए कि अध्यापक का काम एक पवित्र कार्य है। इसमें किसी चीज की मिलावट नहीं होनी चाहिए। बच्चों को अच्छा ज्ञान देने के लिए जरूरी है कि अध्यापक भी समय के अनुसार अपने आप को ढलते रहें और अपने ज्ञान में बढ़ौतरी करते रहें। साथ ही साथ ही साथ तजुर्बेकार अध्यापकों से मिलकर उनके अनुभवों से सीख लेना भी फायदेमंद साबित होता है। याद रखें बेहती हुई नदी हमेशा मीठा पानी देती है। लेकिन एक जगह पर रुके हुए तालाब का पानी भी सड़ने लगता है।

अच्छी आधारिक संरचना (Infrastructure) –

अच्छे कोचिंग इंस्टीट्यूट का मतलब सिर्फ यह नहीं होता की आप कितना अच्छा सीख रहें हैं, वरन् कितनी अच्छी जगह पर सीखा रहे हैं यह भी उतना ही जरूरी होता है। एक अच्छे कोचिंग इंस्टीट्यूट में बच्चों को बैठने के लिए पर्याप्त जगह होनी चाहिए, सभी तरफ की सुविधा जैसे कि बैठने के लिए बेंचेस, पर्याप्त लाइट की व्यवस्था, और साथ ही washrooms भी होना जरूरी है। इन सब सुविधाओं की वजह से बच्चों के मातापिता भी बिना किसी संकोच के उन्हें इंस्टीट्यूट में भेजने के लिए तैयार हो जाते हैं।

पंजीकरण –

सर्वप्रथम यह आवश्यक है कि आप अपने कोचिंग सेंटर का India University के पास पंजीकरण करलें। इससे आपके इंस्टीट्यूट को एक कानूनी स्वरूप प्राप्त हो जाता है। और बाकी इंस्टीट्यूट के मुकाबले आपके इंस्टीट्यूट का रुतबा और अहोदा बड़ा हो जाता है। और कानूनी तरीके से पंजीकरण करने से आपके इंस्टीट्यूट की तरफ लोग आकर्षित होते हैं

अपनी कोचिंग सेंटर की मार्केटिंग कैसे करे

यदि आपकी कोचिंग नई है तो स्वाभाविक सी बात है कि बहुत की कम लोग आपकी कोचिंग के बारे में जानकारी रखते होंगे इसलिए आपको यदि अपनी कोचिंग को अपने क्षेत्र में एक जगह दिलानी है तो आपको इसकी मार्केटिंग का विशेष ध्यान रखना होगा आजकल का दौर विज्ञापन का दौर है। तो अगर आप चाहते हैं कि आपके कोचिंग इंस्टीट्यूट में ज्यादा से ज्यादा बच्चे एडमिशन लें, तो यह जरूरी है कि आप ज्यादा से ज्यादा लोगों तक अपने कोचिंग इंस्टीट्यूट की खबर पोहिचाएं। इसके लिए सोशल मीडिया जैसे आधुनिक साधनों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। और आप आपके कोचिंग का Ad समाचार पत्र आदि में निकलवा सकते है यकीन मानिए, इससे आपके इंस्टीट्यूट में एडमिशन बढ़ने में सहायता जरूर मिलेगी।

कोचिंग सेंटर शुरू करने की अनुमानित लागत कितनी होगी 

यदि कोचिंग सेंटर की बात करें, तो जो इसमे मुख्य खर्चा आता है वह एक अच्छे और बड़े कमरे का होता है वैसे तो यदि आप चाहे तो इसे घर पर ही शुरू कर सकते हैं, लेकिन जगह की कमी की वजह से कई बार आपको कमरा किराए पर लेना पड़ता है यदि एक सामान्य कमरे के अनुमानित किराए की बात करें तो यह करीब 5000 तक पड़ जाता है

इसके अलावा एक पंखा भी आवश्यक है जो की 2000 तक आसानी से मिल जाता है अब कुर्सियां वाइट बोर्ड, लैपटॉप, इंटरनेट, बेंच, चॉक, डस्टर, मार्कर आदि को मिलाकर अनुमानित लागत निकाले तो यह करीब 60,000-70,000 रु तक पड़ता है 

कोचिंग सेंटर से होने वाली कमाई कितनी हो सकती है

कोचिंग सेंटर बिजनेस से होने वाली कमाई इस बात पर निर्भर करती है कि आप किस क्लास के बच्चों को पढ़ा रहे हैं साथ ही आपके कोचिंग क्लास में कितने बच्चे पढ़ने के लिए आते है यदि एक अनुमान लगाएं और यह मान ले कि आपकी क्लास में 50 बच्चे आते है, जिनमे से आप प्रत्येक से 500 फीस लेते है तो कुल मिलाकर आपकी कमाई 25000 रुपये होगी 

आशा है कि उपरोक्त सभी बातों का ख्याल रखकर आप अपने लिए एक बेहतर कोचिंग इंस्टीट्यूट बना सकते हैं। यही नहीं, इस आर्टिकल में छात्रों और उनके मातापिता के लिए भी यह जानकारी है कि उन्हें एक अच्छे कोचिंग इंस्टीट्यूट से क्या अपेक्षा रखनी चाहिए। आखिरकार अच्छी शिक्षा से ही एक बेहतर कल का निर्माण हो सकता है।

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