Coaching Center Kaise Khole? कोचिंग सेंटर शुरू करने की पूरी जानकारी

Coaching Center Kaise Khole? और रजिस्ट्रेशन कैसे करें जाने पूरी जानकारी | How to Start Coaching Center Full Information in Hindi 

Coaching Center Business in Hindi – आजकल स्कूल जानेवाले सभी छात्रों के माता पिता को यह चिंता जरूर सताती है कि उनका बच्चा अच्छी पढ़ाई कर रहा है या नहीं। और स्कूल के समय के बाद भी उन्हें कैसे पढ़ाई में संलग्न किया जाए जिससे कि उनके मार्क्स में बढ़ौतरी हो। ऐसे में उनकी तलाश शुरू हो जाती है एक अच्छे कोचिंग इंस्टीट्यूट की जहां से पढ़कर उनके बच्चों की अच्छी पढ़ाई हो सके।

तो अगर आप भी ऐसे किसी कोचिंग इंस्टीट्यूट शुरू करने के बारे में सोच रहे हैं, आप भी शिक्षा के क्षेत्र में कैरियर बनाना चाहते हैं, और अगर आप में भी बच्चों को अच्छे से सिखाने का हुनर है लेकिन आप किसी स्कूल में काम नहीं करना चाहते तो आपको कैरियर बनाने के लिए कोचिंग इंस्टीट्यूट एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है।

आज हम इस पोस्ट में Coaching Center Kaise Khole, इस पर बात करने वाले है। आज आपको इस पोस्ट में कोचिंग क्या है,कितने प्रकार की होती है, इसे खोलने के लिए क्या करना पड़ेगा और ऑनलाइन कोचिंग के बारे में भी जानकारी मिलने वाली है तो बने रहिए हमारे साथ अंत तक। अगर आप बिजनेस करना चाहते है और उसके लिए एक कोचिंग सेंटर खोलना चाहते है तो आपको आज मैं उससे जुड़ी सारी जानकारियां देने वाला हूं।

वर्तमान में कोचिंग सेंटर बिजनेस और शिक्षा के लिए बहुत ही अहम हिस्सा बन चुका है। आप आसानी से थोड़ा सा इन्वेस्ट करके पैसे कमा सकते है। तो चलिए जानते है आज के इस विषय के बारे में कि आपको एक कोचिंग सेंटर खोलने के लिए क्या क्या करना पड़ेगा।

Table of Contents

कोचिंग सेंटर क्या होता है? What is Coaching Center

सबसे पहले आपको ये जान लेना बहुत जरूरी है कि आखिर कोचिंग सेंटर है क्या इसमें होता क्या है। जैसा कि आप लोगो को पता ही होगा। आज कल बच्चो के माता पिता चाहते है कि उनका बच्चा स्कूल की पढ़ाई के अलावा भी अपनी पढ़ाई पर कुछ अलग से समय देकर कुछ अच्छा करे। उसी के लिए स्कूलों के अलावा भी कुछ प्राइवेट और गवर्नमेंट तरीको से कुछ ऐसे संस्थान होते है जहा पर बच्चे आसानी से अपना समय देकर बहुत कुछ सीख सकते है। इन संस्थानों को ही कोचिंग सेंटर कहा जाता है।

कोचिंग कितने प्रकार की होती है? Types of Coaching Center

अगर हम बात करे कोचिंग सेंटर के प्रकारों की तो वैसे कोचिंग कई प्रकार की होती है। कोचिंग संचालन की दृष्टि से दो प्रकार की होती है।

1 ऑनलाइन कोचिंग सेंटर।
2 ऑफलाइन कोचिंग सेंटर।

वही अगर विषय और क्षेत्र के हिसाब से देखा जाए तो भी कोचिंग दो प्रकार की होती है।

1 कक्षाओं के लिए।
2 तैयारी के लिए।

कक्षा एक से बारह या और उसके बाद भी पढ़ाई की जाने वाली कोचिंग पहली श्रेणी में आती है और दूसरी श्रेणी में इसी नौकरी की परीक्षा के लिए आवश्यक विषयों की तैयारी कराने वाले कोचिंग आते है।

कोचिंग सेंटर की शुरुआत कैसे करें? How to Start a Coaching Center in India

आप अगर कोचिंग सेंटर खोलने का मन बना चुके है तो उसके पहले कुछ जरूरी बातों का खयाल रखना बहुत जरूरी होता है। आप कोचिंग सेंटर खोलने से पहले इन पहलुओं पर अच्छे से जानकारी प्राप्त करने के पश्चात ही कोई कदम आगे बढ़ाए। कुछ जरूरी बातों में ये मुख्य है।

कोचिंग सेंटर शुरू करने के लिए अच्छी जगह का चुनाव –

कोचिंग सेंटर खोलने से पूर्व आपको उसके लिए एक अच्छे स्थान का चयन करना बहुत जरूरी है। आवागमन और शांत वातावरण को ध्यान में रखते हुए कोई अच्छी जगह का चयन करना चाहिए। ध्यान रखे कोचिंग इंस्टीट्यूट एक साफ सुथरे माहौल में होना चाहिए, भीड़भाड़ वाले इलाके दूर, और बच्चों के आने जाने की दृष्टि से उपयुक्त स्थान पे होना चाहिए। साफ सुथरे माहौल से आपके इंस्टीट्यूट की शोभा बढ़ेगी। बच्चों का और उनके माता पिता का ध्यान इंस्टीट्यूट की तरफ आकर्षित होगा। भीड़भाड़ वाले इलाके से दूर होने की वजह से और शांत वातावरण में पढ़ने से बच्चों का पढ़ने में और शिक्षकों का पढ़ाने में ध्यान बना रहेगा। 

अनुभवी लोगों की सलाह –

कोचिंग सेंटर शुरू करने से पहले उस क्षेत्र के अनुभवी लोगों की सलाह लेना कभी भी फायदेमंद हो सकता है। उनके अनुभवों से सीख लेकर हम अपने कोचिंग सेंटर को और बेहतर बना सकते हैं। और उनके काम करने के तरीके देख कर हमें अपने काम करने की दिशा निश्चित करने में आसानी मिलती है।

विषयों का चयन –

कोचिंग के संचालन से पूर्व ही आपको विषय का निर्धारण करना बेहद जरूरी है। आपको अपने कोचिंग सेंटर में किन विषयों का संचालन करना है ये निर्धारित होना जरूरी है क्योंकि उसी के अनुसार आप उस विषय के शिक्षक को रखेंगे।

आप कोचिंग इंस्टीट्यूट में कौनसी कक्षा को सिखाएंगे और कौनसे विषय सिखाएंगे यह निश्चित करलें। एक साथ स्कूल और कॉलेज दोनों के लिए क्लासेस शुरू करने से अच्छा है कि पहले छोटी शुरुवात करें। पहले सिर्फ स्कूल के बच्चों के लिए कोचिंग शुरू करके फिर जब धीरे धीरे सफलता मिलने लगे तो फिर बाद में दूसरे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। और इस बात का भी research करलें कि ऐसे कौनसे विषय हैं जिनमें छात्रों की रुचि है लेकिन वह विषय सिखाने वाले लोग काम है। ऐसे विषयों का भी चयन किया जा सकता है।

उपयुक्त और well qualified शिक्षकों का चयन –

जहां एक अच्छा शिक्षक आपके इंस्टीट्यूट को बुलंदियों तक पहुंचा सकता है वहीं एक बुरा शिक्षक उसे डूबा भी सकता है। इसलिए अपने कोचिंग इंस्टीट्यूट में शिक्षक नियुक्ति से पहले उनके शैक्षणिक स्तर कि और बाकी बातों कि जांच कर लेना बहुत आवश्यक होता है। उनके सिखाने के तरीके पे निर्भर करता है कि आपके इंस्टीट्यूट में बच्चों के एडमिशन बढ़ेंगे या कम होंगे।

उचित शैक्षणिक साधनों का इस्तेमाल –

जब भी कोई शिक्षक अच्छे साधनों का इस्तेमाल अपने अध्यापन में करता है तो उसकी सिखाए हुई बात का असर (impact) बहुत अच्छा होता है। उचित साधनों के इस्तेमाल से जहां बच्चों का अध्यापक के सिखाने की तरफ ध्यान और आकर्षित होता है, वहीं उनकी उत्सुकता देख कर एक शिक्षक भी और जोश में उन्हें पढ़ा सकता है। आप इसमें पाठयपुस्तक के अलावा overhead projectors, PPts, Live Demonstrations जैसे साधनों का इस्तेमाल करके अपने अध्यापन को और बेहतर बना सकते हैं।

फीस निर्धारण

सबसे जरूरी बातों में फीस भी आती है आपको पहले से ही एक बच्चे से ली जाने वाली फीस का निर्धारण करना होता है। इसे दो तरह से कर सकते है। पहला monthly फीस ले सकते है और दूसरा आप पूरे कोर्स की फीस निर्धारित कर ले।

शुरुवाती दौर में यह जरूरी है कि आप भले ही कितना ही अच्छा पढ़ाने का दावा करें लेकिन बच्चों के मातापिता का ध्यान आपके इंस्टीट्यूट की तरफ आकर्षित करने के लिए कम फीस से शुरुवात करें। और जैसे जैसे आप सफलता हासिल करने लगें तो फिर आप फीस बढ़ाने के बारे में सोच सकते हैं। याद रखिए। किसी भी बड़ी चीज की शुरुवात हमेशा छोटी चीज से ही होती है। और जैसा कि English में एक कहावत है कि struggle in silence, and let your success make the noise। तो पहले यह जरूरी है कि आप अपने टैलेंट के जोर पर लोहा मनवाएँ।

अच्छी शिक्षा में कमी नहीं आनी चाहिए –

कम फीस लेने का यह मतलब बिल्कुल नहीं की आप क्वालिटी से समझौता करें। कुछ शिक्षक ज्यादा फीस तो ले लेते हैं लेकिन उस स्तर का शिक्षण नहीं दे पाते हैं जिससे बच्चों का शैक्षणिक और उनके मातापिता का आर्थिक नुकसान होता है। लेकिन आपको इस बात को हमेशा याद रखना चाहिए कि अध्यापक का काम एक पवित्र कार्य है।

इसमें किसी चीज की मिलावट नहीं होनी चाहिए। बच्चों को अच्छा ज्ञान देने के लिए जरूरी है कि अध्यापक भी समय के अनुसार अपने आप को ढलते रहें और अपने ज्ञान में बढ़ौतरी करते रहें। साथ ही साथ ही साथ तजुर्बेकार अध्यापकों से मिलकर उनके अनुभवों से सीख लेना भी फायदेमंद साबित होता है। याद रखें बेहती हुई नदी हमेशा मीठा पानी देती है। लेकिन एक जगह पर रुके हुए तालाब का पानी भी सड़ने लगता है।

अच्छी आधारिक संरचना (Infrastructure) –

अच्छे कोचिंग इंस्टीट्यूट का मतलब सिर्फ यह नहीं होता की आप कितना अच्छा सीख रहें हैं, वरन् कितनी अच्छी जगह पर सीखा रहे हैं यह भी उतना ही जरूरी होता है। एक अच्छे कोचिंग इंस्टीट्यूट में बच्चों को बैठने के लिए पर्याप्त जगह होनी चाहिए, सभी तरफ की सुविधा जैसे कि बैठने के लिए बेंचेस, पर्याप्त लाइट की व्यवस्था, और साथ ही washrooms भी होना जरूरी है। इन सब सुविधाओं की वजह से बच्चों के मातापिता भी बिना किसी संकोच के उन्हें इंस्टीट्यूट में भेजने के लिए तैयार हो जाते हैं।

कोचिंग सेंटर का रजिस्ट्रेशन कैसे करें? Coaching Center Registration 

अब बात आती है आप अपने कोचिंग का रजिस्ट्रेशन कैसे करें। अगर आप कोचिंग सेंटर चलाना चाहते है तो गवर्नमेंट के आदेशानुसार आपको उसका एक वर्चुअल रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होता है। कोचिंग सेंटर खोलना और चलाना बिजनेस में आता है इसलिए उसका पहले से रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है। रजिस्ट्रेशन के बाद आपको अपनी कोचिगं से की गई कमाई का सरकार को टैक्स भी भरना पड़ता है।

आपके मन में ये भी सवाल उठ रहा होगा कि रजिस्ट्रेशन करना क्या इतना जरूरी है। तो मैं आप लोगो को बता दूं कि रजिस्ट्रेशन करने से आपकी कोचिंग को क़ानूनी मान्यता प्राप्त हो जायेगी और आपको एक जीएसटी नंबर भी मिल जायेगा। अब चलिए जानते है कैसे रजिस्ट्रेशन करें। 

कोचिंग का रजिस्ट्रेशन कई तरह का होता है। जिनमे से कुछ है–

1 स्वयं की जिम्मेदारी पर खुद का कोचिंग सेंटर।
2 साझेदारी कोचिंग सेंटर (कई शिक्षक मिलकर खोले)
3 प्राइवेट लिमिटेड कंपनी या ललप

सबसे ज्यादा 80 प्रतिशत लोग स्वयं खुद का कोचिंग खोलते है। इसके लिए सबसे पहले आपको स्टेट गवर्नमेंट से परमिशन लेने के लिए अप्लाई करना होगा। भारत में अलग अलग राज्य में अलग अलग तरीके से कोचिगं सटेंर के लिए रजिस्ट्रेशन करने के अपने नियम है। लेकिन सभी राज्यों की इन चीजों की एक वेबसाइट होती है जिस पर आप आसानी से सारी डिटेल्स देकर अपने कोचिगं सटेंर का रजिस्ट्रेशन कर सकते है।

रजिस्ट्रेशन कराने पर आपको टैक्स जरूर भरना पड़ता है लेकिन उसके साथ साथ आपको कोचिगं सटेंर बदं करने जैसी समस्या से छुटकारा मिल जाता है। इसलिए अगर आप कोचिगं सटेंर खोलना चाहते है तो उस राज्य की आधिकारिक वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन जरूर कराएं।

इसके पश्चात आपको अपनी कोचिंग सेंटर के लिए एक नाम तय करना पड़ेगा। उसे आप अपने अनुसार रख सकते है। नाम के साथ आपको सारे डिटेल्स और जीएसटी नंबर से अप्रूवल मिल जायेगा और आप आसानी से अपनी कोचिंग चला सकते है।

अगर आप चाहे तो ISO और MSME सर्टिफिकेट के लिए भी अप्लाई कर सकते है। इसके लिए आपको बस एक ऑनलाइन फॉर्म अप्लाई करना होगा और कोचिंग से संबंधित सारी जानकारी देनी होंगी। फिलहाल इस सर्टिफिकेट की कोई खास आवश्यकता नही पड़ती।

ऑनलाइन कोचिंग कैसे शुरू करें? How to Start Online Coaching

बहुत सारे कोचिंग सेंटर को लॉकडाउन और corona के चलते बहुत सी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जिसमे उन्हें ऑनलाइन क्लासेज संचालित करना पड़ा। ऑनलाइन कोचिंग सेंटर चलाने में भी ज्यादा कुछ नहीं करना पड़ता।बस आपके पास अपने बच्चो का एक डाटा ग्रुप होना चाहिए जिसके द्वारा आप लिंक भेजकर जूम या फिर यूट्यूब पर ऑनलाइन क्लास ले सकते है।

अगर आपका कोचिंग सेंटर बड़ा है तो आप अपने कोचिंग सेंटर का एक एप बनाकर सारी सुविधाएं दे सकते है। आप उसी एप के माध्यम से फीस भी ले सकते है और बच्चो को उनकी ऑनलाइन क्लासेस भी टाइम पर दी जा सकेगी। एप केही मदद से आप पढ़ाई से संबंधित सारे कंटेंट और पीडीएफ फ़ाइल बच्चो तक आसानी से पहुंचा सकते है।

Corona महामारी के दौरान लगभग सारे कोचिंग सेंटर ने ऑनलाइन क्लास ही ली। अगर आप अपने कोचिंग सेंटर को ऑनलाइन तरीके से ही चलाना चाहते है तो आपको इसके लिए कुछ अलग तैयारियां करनी होंगी उसके लिए आपको सामान्य बोर्ड की जगह एलईडी बोर्ड चाहिए होगा। जिससे आप आसानी से क्लास ले सकते है।

दोस्तों मुझे आशा है आप सबको इस पोस्ट में सारी जानकारियां मिल गई होगी। कमेंट्स में जरूर बताएं कि आप लोगो को हमारी ये पोस्ट कैसे लगी।

अपनी कोचिंग सेंटर की मार्केटिंग कैसे करें?

यदि आपकी कोचिंग नई है तो स्वाभाविक सी बात है कि बहुत की कम लोग आपकी कोचिंग के बारे में जानकारी रखते होंगे इसलिए आपको यदि अपनी कोचिंग को अपने क्षेत्र में एक जगह दिलानी है तो आपको इसकी मार्केटिंग का विशेष ध्यान रखना होगा आजकल का दौर विज्ञापन का दौर है।

तो अगर आप चाहते हैं कि आपके कोचिंग इंस्टीट्यूट में ज्यादा से ज्यादा बच्चे एडमिशन लें, तो यह जरूरी है कि आप ज्यादा से ज्यादा लोगों तक अपने कोचिंग इंस्टीट्यूट की खबर पोहिचाएं। इसके लिए सोशल मीडिया जैसे आधुनिक साधनों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। और आप आपके कोचिंग का Ad समाचार पत्र आदि में निकलवा सकते है यकीन मानिए, इससे आपके इंस्टीट्यूट में एडमिशन बढ़ने में सहायता जरूर मिलेगी।

कोचिंग सेंटर शुरू करने की अनुमानित लागत कितनी होगी?

यदि कोचिंग सेंटर की बात करें, तो जो इसमे मुख्य खर्चा आता है वह एक अच्छे और बड़े कमरे का होता है वैसे तो यदि आप चाहे तो इसे घर पर ही शुरू कर सकते हैं, लेकिन जगह की कमी की वजह से कई बार आपको कमरा किराए पर लेना पड़ता है यदि एक सामान्य कमरे के अनुमानित किराए की बात करें तो यह करीब 5000 तक पड़ जाता है

इसके अलावा एक पंखा भी आवश्यक है जो की 2000 तक आसानी से मिल जाता है अब कुर्सियां वाइट बोर्ड, लैपटॉप, इंटरनेट, बेंच, चॉक, डस्टर, मार्कर आदि को मिलाकर अनुमानित लागत निकाले तो यह करीब 60,000-70,000 रु तक पड़ता है 

कोचिंग सेंटर से होने वाली कमाई कितनी हो सकती है?

कोचिंग सेंटर बिजनेस से होने वाली कमाई इस बात पर निर्भर करती है कि आप किस क्लास के बच्चों को पढ़ा रहे हैं साथ ही आपके कोचिंग क्लास में कितने बच्चे पढ़ने के लिए आते है यदि एक अनुमान लगाएं और यह मान ले कि आपकी क्लास में 50 बच्चे आते है, जिनमे से आप प्रत्येक से 500 फीस लेते है तो कुल मिलाकर आपकी कमाई 25000 रुपये होगी 

आशा है कि उपरोक्त सभी बातों का ख्याल रखकर आप अपने लिए एक बेहतर कोचिंग इंस्टीट्यूट बना सकते हैं। यही नहीं, इस आर्टिकल में छात्रों और उनके मातापिता के लिए भी यह जानकारी है कि उन्हें एक अच्छे कोचिंग इंस्टीट्यूट से क्या अपेक्षा रखनी चाहिए। आखिरकार अच्छी शिक्षा से ही एक बेहतर कल का निर्माण हो सकता है।

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