स्कूल खोलना है कैसे खोले जानिए पूरी प्रक्रिया और इसके नियम

अपनी खुद की स्कूल कैसे खोले जाने पूरी प्रक्रिया और इसके नियम 

भारत जनसंख्या की दृष्टि से दूसरा सबसे बड़ा देश है। ज्यादा आबादी होने की वजह से हमारे देश में विद्यालयो की मांग बढ़ती जा रही है। इस बढ़ती हुयी मांग को देखकर यह एक अच्छा मुनाफा करने वाला काम साबित हो सकता है। एक अच्छा स्कूल खोलकर आप अच्छे खासे पैसे कमा सकते है। आप देखते ही होंगे कि आजकल सारे सरकारी स्कूल किस व्यवस्था से गुजर रहे हैं ,ऐसा नही की सरकार पैसे नही देती ,पैसे सरकार बहुत खर्च करती है लेकिन वो पैसे स्कूल तक पहुचते-पहुचते खत्म हो जाते हैं,क्योंकि ज्यादातर कर्मचारी भृष्ट है और बात पढाई की करें तो कोई भी समझदार व्यक्ति अपने बच्चे को किसी सरकारी स्कूल में नही पढ़ाना चाहता बजह आपको भी अच्छे से पता है,जिसके लिए अभिभावक किसी प्राइवेट और अच्छे स्कूल को ढूढ़ते हैं ऐसे में आपके पास एक अच्छा उपाय स्कूल खोलने का हालांकि स्कूल खोलने में खर्चा तो अधिक है लेकिन जो फायदा आपको स्कूल खोलने के बाद होगा उसके मुकाबले बहुत कम है। बिजनेस चाहे जैसा हो इन्वेस्ट जितना अधिक होगा रिटर्न्स भी उतना ही अधिक होगा। 

यहां आपको आज हम सरल भाषा मे बताएंगे कि किस तरह से आप एक अपना स्कूल खोल सकते हैं।

प्लान बनायें

आपके लिये ये बेहद जरुरी है की आप सबसे पहले एक रोडमेप या प्लान बनायें जिस से ये पता चल सके की आप को क्या क्या बातो का ख्याल रखना है और आपका स्कूल कैसा होगा। सबसे पहले आप को ये तय करना रहेगा की आप कौन सा स्कूल खोलना चाहते है। प्री-स्कूल, डे केर, और क्लास ६ तक आप मुनिसीपालिटी की परमिशन से स्कूल खोल सकते है और ये आप के लिये अच्छा भी रहेगा ताकी आपको अच्छे से अनुभव भी मिल जायेगा। अगर आप इस से उपर के क्लास का स्कूल खोलना चाहते है तो आप को राज्य शिक्षा बोर्ड और अन्य बोर्ड्स के परमिशन लेना अनिवार्य रहेगा।

एरीया

आप को एक अच्छा सा एरीया खोजना होगा जहां आप अपना स्कूल आसानी से शुरु कर सके। ऐसा एरीया होना चाहीये जहां अन्य स्कूल काफ़ी दुरी पर हो, बच्चो की संख्या ज्यादा हो और ट्रान्सपोर्टेशन भी सरलता से उपलब्ध हो। इस से आप को बच्चे जो आप की स्कूल में दाखीला ले वो आसानी से मिल जायेंगे और जरुरी स्टाफ़ भी उपलब्ध हो जायेगा। आप को स्कूल शुरु करने से पहेले ही स्टाफ़ को हायर करना होगा ताकी पेरंट्स आप की स्कूल पर भरोसा जता सके। स्टाफ़ की जरुरत आप को किस तरह का और किस लेवल पर स्कूल खोल रहे है उस पर निर्भर करती है।

स्कूल किस कक्षा तक खोलें?

अब आपने अपना मन स्कूल खोलने के लिए बना ही लिया है तो आपको बता दे शुरुआत में आपको ये निर्णय लेना होगा की आप अपने स्कूल को कौन सी कक्षा तक के लिए खोलना चाहते है यह निर्णय लेना इसलिए भी जरुरी है क्योंकि इसके हिसाब से ही स्कूल के लिए जगह और रजिस्ट्रेशन आदि कराने होंगे। स्कूल मुख्यत तीन प्रकार के होते है जिसमे प्ले ग्रुप , प्री-प्राइमरी और प्राइमरी शामिल है।

फर्नीचर की व्यबस्था-

एक समय था जब बच्चे जमीन पर बैठकर शिक्षा प्राप्त करते थे लेकिन आज समय बहुत बदल गया है और समय के साथ इंसान को भी बदलना चाहिए। बच्चो के लिए बेंच और मेज बनाने आदि का इंतजाम भी करना होगा।जिसके लिए आपको कमरों औऱ बच्चो के हिसाब से बेंच का इंतजाम करना होगा,आपको ध्यान रहे कि बच्चे आराम से बैठ सकें।

स्कूल के प्रकार-

आपको ये जानना भी जरूरी है को स्कूल कितने प्रकार के होते है-

सबसे पहले बात आती है प्राथमिक विद्यालय की जहाँ पर बच्चो की शिक्षा की नींव रखी जाती है और उन्हें पढ़ना सिखाया जाता है,उसके बाद आता है माध्यमिक स्कूल जहाँ पर आपको 6 से 8 तक पढ़ाया जातक है। अब नए शिक्षा नियम आ गए है तो इन नियमो में कुछ बदलाव किए गए है जैसे कि – क्लास 0 से 2 तक और फिर 3-5 फिर 6-8,8-10 और आगे लेकिन यहां पर हाइस्कूल यानी 10th को बोर्ड से हटा दिया गया है।

विद्यालय प्रबंधन-

1) स्कूल के होने वाले प्रबंधक 12th के बाद D. Ed या स्नातक के बाद B. ed. कर सकते हैं।
2) आप किसी संस्थान से विद्यालय विद्यालय प्रबंधन का कोर्स भी कर सकते हैं
3) इन सब के बाद आप विद्यालय प्रबंधन का जिम्मा ले सकते हैं।
4) आपके पास लगभग 5 साल किसी विद्यालय में पढ़ाने का अनुभव भी होना चाहिए तभी आप प्रबन्धक के पद के योग्य माने जाएंगे।

विद्यालय खोलने की जरूरतें-

1) आपके पास एक अच्छी हवादार ,बिल्डिंग होनी चाहिए।
2) बिल्डिंग शराबखाने या किसी गल दुकान से उचित दूरी पर हो।
3) बिल्डिंग नई अथबा मजबूत होनी चाहिए।
4) बिल्डिंग में क्लास के अनुसार आवश्यक कमरे होने जरूरी हैं।
5) बिल्डिंग में क्लास के साथ कार्यालय और एक पुस्तकालय होना आवश्यक है।
6) साथ ही शौचायल होना भी आवश्यक है जो चालू हालत में हो।
7) शिक्षक राज्य सरकार के किसी अध्यापन कोर्स या फिर B.Ed. या B.T.C.किए होना चाहिए।

स्कूल के लिए रजिस्ट्रेशन-

1) ये बहुत ही जरूरी काम है किसी विद्यालय को खोलने के लिए ,आपको सरकारी परमिशन की आवश्यकता होती है किसी भी व्यपार के लिए फिर चाहे तो स्कूल ही क्यों न हो।
2) इसके लिए आप सबसे पहले किसी सोसाइटी या कमेटी का निर्माण करना होगा जिसमें कम से कम 7-10 लोग तो होने ही चाहिए।
3) उस सोसायटी के लिए आपको अपने एरिया के रजिस्ट्रार कार्यालय में जाकर फीस देकर एक एजुकेशनल सोसाइटी रजिस्टर करनी होगी।
4) इसके बाद आपको इसका एक प्रमाण पत्र मिल जाएगा ।
5) उसके बाद आप अप्रैल में होने वाली ऑनलाइन स्कूल पंजीकरण में किसी भी जन सेवा केंद्र से आवेदन कर सकते हैं ।
6) जहां आपको अपनी सोसायटी के सर्टिफिकेट लगाना होगा और साथ ही बाकी दस्ताबेज भी।
7) जहां आपको कुछ पैसे खर्चने पड़ सकते हैं लगभग 10000 रुपए।
8) इसके बाद सरकार की तरफ से एक टीम आपके कालेज और स्टाफ की जांच के लिए आएगी।
9) आपके दस्ताबेज और बाकी चेकिंग के बाद आपको मंजूरी मिल जाएगी और आप विद्यालय चला सकते हैं।
10) आपको विद्यालय से सम्बंधित अधिकार और प्रशिक्षण दिया जाएगा।

स्कूल खोलने के लिए नियम

स्कूल खोलने के लिए वेसे तो कई नियम हो सकते है आपको हर नियम को अच्छे से मानना पड़ता है। स्कूल खोलने के लिए आप डी.एल.एड. किये हुए होने चाहिए। इसके अलावा आप चाहे तो B.Ed भी कर सकते है। B.ED के लिए आपको इसका एग्जाम क्वालीफाई करना अनिवार्य है। एग्जाम क्वालीफाई करने के बाद आपको ग्रेजुएशन करनी होगी। इधर प्रशिक्षण लेने के बाद आपको “IGNOO” से विद्यालय प्रबंधन का कोर्स करना पड़ता है यह कोर्स अनिवार्य होता है। इसके बाद आपके पास 5 वर्ष तक स्कूल में पढ़ाने का अनुभव भी होना चाहिए।

मान्यता प्राप्त करने की प्रक्रिया

अगर आप ऊपर की बातो पर खरे उतरते है तो अब आप मान्यता प्राप्त करने के लिए तैयार है। तो स्कूल की मान्यता प्राप्त करने के लिए आपको बहुत सी अलग अलग तरह की प्रक्रियाओ का पालन करना पड़ेगा। प्राथमिक स्कूल खोलना बहुत ही आसान है इसके लिए सबसे पहले आपको 9 से 11 लोग के साथ मिलकर एक संस्था का निर्माण करना होगा।

संस्था के निर्माण होने के तुरंत बाद ही आपको रजिस्ट्रार के पास जाना होता है वहां पर आप संस्था के रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करेंगे। संस्था के रजिस्ट्रेशन में आपके 12 हजार रुपये तक खर्च हो सकते है। और रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद संस्था के रजिस्ट्रेशन का सर्टिफिकेट आपको मिल जायेगा।

इसके बाद हर साल april-may के महीने में नए विद्यालय खोलने के लिए आॅनलाइन पंजीयन होता है आपको विद्यालय खोलने के लिए पंजीयन( Registration) कराना होगा। इसमें आपके लगभग 3 हजार रुपये खर्च हो सकता है ।

इसके बाद आपको इस फॉर्म को लेना है और उसको भरना है फॉर्म भरने के बाद उस फॉर्म को संस्था के certificate की काॅपी के साथ अटेच करना है फिर उसको D.E.O. ऑफिस में जमा करवा दे। D.E.O. ऑफिस में आपको डॉक्यूमेंट के साथ 12 हजार रुपये भी देने होंगे।

डॉक्यूमेंट जमा करने के कुछ दिन बाद आपके विद्यालय को देखने कुछ ऑफिसर आएंगे। यह ऑफिसर आपके सारे डाॅक्यूमेंट को एक बार और चेक करेंगे। इसके अलावा पुरे विद्यालय को भी देखेंगे। अगर यह लोग आपके स्कूल और कागजो को पास कर देते है तो आप अपना स्कूल खोल सकते है

टीचर किस आधार पर ले?

विद्यालय के लिए अध्यापकों के लेते समय ध्यान रहे कि कम से कम आपके 2 अध्यापक तो B.ED किये हुए होने ही चाहिए। यह स्कूल खोलने का एक जरुरी मानक है जिसका पालन अनिवार्य है।

स्कूल से होने वाला मुनाफा(fees kitni rakhein?)

स्कूल से आप कोशिश करें तो आराम से 2 से 3 लाख तक हर साल कमा सकते है। मान लीजिये आपके स्कूल में कुल 100 छात्र पढ़ते है। और हर छात्र की फीस 6,000₹ है तो 100 छात्र है से आप सालाना 6,00,000 ₹ कमा लेंगे। पर इन रुपयो में आपको अपने अध्यापको को , बिजली का बिल और बाकी खर्चे भी देने होंगे। अगर इन सब को मिला ले तब भी आप 3 लाख तक ही खर्च कर पाएंगे। 3 लाख आपके पास बचेंगे जो आपका मुनाफा होगा।

स्कूल का प्रमोशन- विज्ञापन

स्कूल खुलने के बाद सबसे जरूरी होता है स्कूल का प्रमोशन ,लोग जाने स्कूल के बारे में इसके लिए आप ऑनलाइन और ऑफलाइन स्कूल का प्रमोशन कर सकते हैं-

ऑनलाइन- आप सोशल साइट्स पर स्कूल के नाम का एक पेज बना सकते हैं जहाँ आप स्कूल के पोस्टर ,वहाँ की सुविधाएं ,वहां के रूम्स की फोटो डालकर लोगों को आकर्षित कर सकते हैं। इसके लिए आप किसी सोशल मीडिया एक्सपर्ट की मदद भी ले सकते हैं।

ऑफलाइन- ऑफलाइन प्रचार के लिए आप प्रचार के कई तरीके काम मे ला सकते हैं जैसे आप क्षेत्रीय अखबार में इश्तेहार दे सकते है, पेंफलेट्स छपवा के बांट सकते है, होर्डींग एवं बेनर भी लगवा सकते है। यहां पर आप के लिये जरुरी रहेगा की आप एक बजट बना कर चले ताकी खर्च के उपर भी एक अंकुश बना रहे। आपका विज्ञापन ऐसा होना चाहिए कि जो लोगो को आकर्षित करे। जितना ज्यादा मार्केटीग होगा उतना ही आपको वर्तमान एवं भविष्य में फ़ायदा होगा।

इन बातों पर बरतें सावधानी

उपर बताये हुए पोइन्टस से अलग कुछ और मुद्दे भी है जिस पर आपको ध्यान देना होगा।

1) अगर आप स्कूल शुरू करना चाहते है तो सबसे पहले कीसी ऐसे इन्सान की मदद ले जिसे इस बात का अनुभव हो। वो आपको सारी जानकारी दे सकता है जिससे आपका स्कूल बनाने के सपना आसानी से साकार हो सकता है। कौन कौन से बोर्ड्स से आपको परमिशन लेनी पडेगी, इन्स्पेक्शन कैसे होता है, क्या क्या डॉक्यूमेंट देने पड़ेंगे, कहां से कौन सी परमिशन मिलेगी, किस किस विभाग से कौन सी परमिशन लेनी पडेगी और अलग अलग परमिशन आने में कितना टाइम लगेगा ये सब बाते आपको इस से पता चल जायेगी जो की आपके लिये बडी महत्वपुर्ण होगी.

2) आपको विविध बोर्ड्स के कुछ कायदे एवं नियमो का पालन करना रहेगा। आपके पास जो भी इन्फ़्रास्ट्रक्चर है वो इन बोर्ड्स के गाइडलाइन के मुताबिक ही होने चाहिये तभी परमिशन आसानी से मिल सकती है। स्कूल में आने वाले बच्चो की सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य जरुरी तो का आप सही से वहन करने के लिये केपेबल हो की नही ये सबसे अहम बात होती है सारे बोर्ड्स के लिये।

3) आपको ये भी देखना होगा की आप एज्युकेशन का माध्यम कौन सा रखेंगे, कौन कौन सी सुविधाएं छात्रोको दे पायेंगे एवं हर स्टुडन्ट की हर स्टान्डर्ड में फीस क्या रहेगी क्युंकी राज्य शिक्षण विभाग की परमिशन से ज्यादा फीस आप नही ले सकते। फीस के अलावा आप कौन कौन से फंड पेरेंट्स से आप लेनेवाले है ये भी आपको शिक्षण विभाग को दीखाना पडेगा और आपके पास ये सब बातो का पर्याप्त नोलेज होना चाहिये।

4) आप के स्कूल के बिल्डींग में पानी की सुविधा होनी चाहिये, अच्छा सा वोशरुम होना चाहिये, कमरो में ताजी हवा का प्रोविजन होना चाहिये, बच्चो के लिये सारे संसाधन एवं खिलौने होने चाहिये, ट्रेईन्ड स्टाफ़ होना चाहिये और बच्चो के स्वास्थ्य के लिये जोखिम हो ऐसी कोइ भी चिज नही होनी चाहिये।

5) प्री-प्राइमरी स्कूल के लिए 3-4 कमरों वाली बिल्डिंग का होना जरुरी है। प्राइमरी स्कूल के लिए आपको 5 कमरे कक्षा के लिए , 1 ऑफिस का रूम 1 लाइब्रेरी और 1 स्टाफ रूम का होना बहुत जरुरी है। इसके अलावा टॉयलेट का उचित इंतज़ाम भी करना होगा।

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