कैसे शुरू करें पैकर्स एंड मूवर्स बिजनेस | Packers and Movers Business Information in Hindi

पैकर्स एंड मूवर्स बिजनेस अपने देश में तेजी से फलफूल रहा है। मुख्य रूप से लोकल और इंटर स्टेट शिफ्टिंग की जरूरतों के लिए कंज्यूमर इसकी मांग करते हैं। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि ही महीने हजारों लोग अपनी नौकरी के चक्कर में रीलोकेशल सेवाओं की मदद लेते हैं। इनकी खोज भरोसेमंद और कम लागत वाले पैकर्स एंड मूवर्स की होती है, जो पैकिंग और शिफ्टिंग में उनकी मदद कर सकें।

यही वजह है कि अपने देश में पैकर्स एंड मूवर्स के बिजनेस में अच्छी संभावनाएं हैं। यदि कोई व्यक्ति शुरुआती इंवेस्टमेंट के साथ अपना बिजनेस शुरू करना चाहता है तो उसके लिए पैकर्स एंड मूवर्स का बिजनेस बढ़िया रिटर्न ला सकता है।

भारत में पैकर्स एंड मूवर्स का स्कोप

लोगों द्वारा जल्दीजल्दी फ्लैट या शहर बदलने की मांग को ध्यान में रखते हुए भारत में पैकर्स एंड मूवर्स सेवाओं की मांग काफी बढ़ गई है। चूंकि यह एक सर्विस आधारित बिजनेस है तो इसमें बहुत ज्यादा इंवेस्टमेंट करने की जरूरत नहीं है। यदि आप अपने कस्टमर्स की देखभाल सही तरह से कर सकते हैं तो भारत में पैकर्स एंड मूवर्स बिजनेस में बढ़िया लाभ कमाया जा सकता है। बिजनेस अच्छा है, मौका बड़ा है और इसमें तकनीकी कुशलता की जरूरत नहीं है। बिजनेस में मार्जिन भी बढ़िया है।

पैकर्स एंड मूवर्स अपने देश में लॉजिस्टिक और ट्रांसपोर्टेशन इंडस्ट्री का हिस्सा है। इसका काम मूलत: घर के सामानों और ऑफिस की चीजों को पैक करके दूसरे शहर या दूसरी जगह पहुंचाने का है। कई बार दूसरे देश में भी सामान पहुंचाने का काम मिलता है, लेकिन इसके लिए आपकी पहुंच दूसरे देशों के पैकर्स एंड मूवर्स तक भी होनी चाहिए।  कभीकभार पैकर्स एंड मूवर्स का काम कंपनियों और कॉरपोरेट्स के लिए कमर्शियल और इंडस्ट्रियल गुड्स शिफ्ट करने का भी होता है।

कौन कर सकता है पैकर्स एंड मूवर्स का बिजनेस

सर्विस आधारित इंडस्ट्री होने की वजह से पैकर्स एंड मूवर्स का बिजनेस शुरू करने में किसी तरह की बाधा नहीं है। इस इंडस्ट्री में मार्केटिंग और साउंड नेटवर्क का अनुभव जिसके पास भी हो, वह पैकर्स एंड मूवर्स के बिजनेस की शुरुआत कर सकता है। इसकी शुरुआत में कम इंवेस्टमेंट की जरूरत पड़ती है, कंज्यूमर द्वारा यह डिमांड में है और रिटर्न भी बहुत अच्छा है।

लेकिन यह जरूर है कि इस क्षेत्र में कंपीटीशन बहुत ज्यादा है क्योंकि इस बिजनेस की शुरुआत करना आसान है। एक रिसर्च के अनुसार, पैकर्स एंड मूवर्स से जुड़े पूछताछ में लगभग 45 फीसद की बढ़ोत्तरी हुई है। इसी से पता चलता है कि भारत में पैकर्स एंड मूवर्स की कितना ज्यादा मांग है।

पैकर्स एंड मूवर्स सर्विसेज

मोटे तौर पर पैकर्स एंड मूवर्स सर्विस प्रोवाइडर एंड टू एंड पैकिंग और मूविंग सर्विस प्रदान करते हैं, जिसमें घरेलू सामान की पैकिंग, लोडिंग, ट्रांसपोर्टेशन, इंश्योरेंस, अनलोडिंग, अनपैकिंग और रीएरेंजिंग शामिल है।

इनका काम इंटर स्टेट ऑफिस रीलोकेशन का भी होता है। साथ ही कुछ समय के लिए सामान को स्टोर में रखना भी। कार ट्रांसपोर्टेशन, इंडस्ट्रियल गुड्स पैकिंग और ट्रांसपोर्टेशन का काम भी पैकर्स एंड मूवर्स के काम के अंतर्गत आता है।

प्लानिंग और इंवेस्टमेंट

भारत में पैकर्स एंड मूवर्स बिजनेस को शुरू करने के लिए हुत ज्यादा लागत की जरूरत नहीं है। बेसिक बिजनेस सेटअप के अलावा, आपको बहुत पैसा नहीं लगाना है। बावजूद इसके आपको आर्थिक पक्ष देखना होगा क्योंकि आपको कुछ चीजों के लिए पैसे तो चाहिए ही।

बिजनेस के लिए जगह

आपके पास एक छोटा ऑफिस होना चाहिए, जरूरी नहीं है कि यह किसी कमर्शियल सेटअप में हो। यदि आप किराये पर ऑफिस लेना चाहते हैं तो आपके पास किराया देने के लिए पैसे होने चाहिए। एक ऑफिस का किराया 3,000 रुपये से शुरू होकर 10,000 रुपये तक जा सकता है। यह आप पर निर्भर करता है कि आप कहां और कितने किराये में ऑफिस ले रहे हैं।  

ऑफिस के लिए सामान

आपको अपने ऑफिस के लिए कुछ बुनियादी चीजें चाहिए, मसलनवर्क डेस्क, कुर्सियां, ऑफिस स्टेशनरी, बिल बुक, कोटेशन बुक, विजिटंग कार्ड, वाउचर आदि। इस सबकी कुल कीमत लगभग 10,000 से 20,000 तक पड़ती है।

उपकरण और कर्मचारी

पैकर्स एंड मूवर्स का बिजनेस सर्विस आधारित है, बावजूद इसके आपको पैकिंग मैटीरियल, पैकिंग टेप आदि तो चाहिए ही होंगे। इन सबकी खरीदारी से पहले मार्केट को एक्सप्लोर करें और तब ही चीजें खरीदें। साथ ही आपको अपनी कंपनी के लिए कुछ कर्मचारी रखने होंगे, उनकी सैलरी आदि देने के लिए तो बेसिक इंवेस्टमेंट चाहिए।

कर्मचारियों को ट्रेनिंग देना आपका काम है। कस्टमर से कैसे बात करना है, उन्हें कैसे भरोसा दिलाना है, इस सबकी ट्रेनिंग जरूरी है। आपकी कंपनी के कर्मचारी यदि इज्जत देकर, दोस्ताना होकर बात करेंगे तो आपको काम मिलने में तनिक भी दिक्कत नहीं होगी।

पैकर्स एंड मूवर्स का बिजनेस के लिए मार्केटिंग है जरूरी

आपको अपनी कंपनी की मार्केटिंग के लिए वेबसाइट बनवाना चाहिए, जिसका एड्रेस आप अपने विजिटिंग कार्ड पर दे सकते हैं। इससे पहले आपको एक लोगो डिजाइनर चुनना होगा, जो आपकी कंपनी का लोगो और फ्लायर वगैरह की डिजाइनिंग कर सके। एक ग्राफिक डिजाइनर आपकी इस जरूरत को पूरा करेगा, जो इस काम के लिए कम से कम 5,000 रुपये ले सकता है।

वेबसाइट पर पैकिंग मैटीरियल, फोन नंबर, आपके द्वारा किए गए कामों का रेफ्रेंस दिया जा सकता है। इस तरह से आपकी एडवरटाइजिंग भी होगी। चाहें तो लोकल न्यूजपेपर के साथ अपनी कंपनी और विशेषताओं के बारे में छपे फ्लायर वितरित करा सकते हैं। इसके जरिए आपके आसपास के लोगों को पता होगा कि आप पैकर्स एंड मूवर्स का काम करते हैं।

साथ ही अपने कर्मचारियों के लिए अपनी कंपनी के लोगो वाला टीशर्ट डिजाइन करा लीजिए। इसके लिए ज्यादा पैसे नहीं लगते हैं। विभिन्न वेबसाइट से लीड जेनरेशन कराने के लिए आपको 5,000- 7,000 रुपये खर्च करने होंगे।

पैकर्स एंड मूवर्स बिजनेस रजिस्ट्रेशन

हर बिजनेस को कुछ कानूनी रजिस्ट्रेशन की जरूरत पड़ती है और इसके लिए भी पैसे चाहिए। आपको अपने ऑफिस और इस्टैबलिशमेंट लाइसेंस पाना होगा। साथ में पैन कार्ड भी। इस सबके लिए आपको पैसे चाहिए और इस सबमें करीब 5,000 रुपये तो आसानी से खर्च हो जाएंगे। वह भी तब जब आप प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के रूप में सेटअप नहीं हो जाते।

कंपनी का निर्माण

आप चाहें तो अपनी कंपनी को पार्टनरशिप, प्रोपराइटरशिप, लिमिटेड लायबिलिटी कंपनी या प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के तौर पर रजिस्टर करा सकते हैं। इससे संबंधित जानकारी के लिए मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स गवर्नमेंट ऑफ इंडिया की वेबसाइट पर जा सकते हैं।

सामान्य पार्टनरशिप और प्रोपराइटरशिप फर्म का रजिस्ट्रेशन आसानी से हो सकता है। लेकिन यदि आप दूसरी तरह से कंपनी को रजिस्टर कराना चाहते हैं तो आपको डायरेक्टर्स आइडेंटिफिकेशन नंबर और डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट चाहिए, साथ ही केवाईसी वाले सारे फॉर्म भी भरने होंगे।

अपनी कंपनी को समझ कर रजिस्टर कराइए और कंपनी के लिए डोमेन नेम भी सही तरीके से ढूंढिए। छोटा नाम हमेशा अच्छा रहता है, इसे याद करने में दिक्कत नहीं होती है।

शॉप एंड इस्टैबलिशमेंट लाइसेंस

किसी भी बिजनेस को करने के लिए भारत की उस क्षेत्र की नगर पालिका से शॉप एंड इस्टैबलिशमेंट लाइसेंस लेना अनिवार्य है। बैंक अकाउंट के लिए अप्लाई करने से पहले आपको नगर पालिका के ऑफिस से ट्रेड लाइसेंस लेना पड़ता है। यह प्रक्रिया आसान है और कुछ हफ्तों में ही पूरी हो जाती है।

आपको एक फॉर्म भरना पड़ेगा और नगर पालिका के ऑफिस में केवाईसी डॉक्यूमेंट्स के साथ इसे जमा कराना है। वे लोग आपकी जगह का सर्वे करेंगे, टैक्स फिक्स करेंगे और तब लाइसेंस जारी करेंगे। कुछ नगर पालिकाएं ऑनलाइन भी एप्लिकेशन स्वीकार करती हैं, तो आपको नगर पालिका के वेबसाइट पर इसकी जांच करनी होगी।

पैन कार्ड

एक बार पैकर्स एंड मूवर्स सर्विस फर्म का रजिस्ट्रेशन हो गया तो आप पैन कार्ड के लिए अप्लाई कर सकते हैं। यह जरूरी है, भले ही आपकी कंपनी कैसी भी हो। आपको इनकम टैक्स फाइल करने के लए पैन कार्ड की जरूरत पड़ती है।

करंट अकाउंट

आपकी कंपनी का करंट अकाउंट होना चाहिए क्योंकि कुछ कस्टमर आपको चेक  के जरिए पैसे देना चाहेंगे और कोई भी आपके नाम पर चेक नहीं जारी करेगा। वे आपकी कंपनी के नाम पर ही पेमेंट करेंगे और इसके लिए आपको करंट अकाउंट खुलवाना पड़ेगा। आपके बिजनेस के लिए करंट अकाउंट खुलवाना बड़ी बात नहीं है, आप किसी भर सरकारी या प्राइवेट बैंक में बात करके करंट अकाउंट खुलवा सकते हैं।

गुड्स एंड सर्विस टैक्स

जीएसटी रजिस्ट्रेशन भर पैकर्स एंड मूवर्स कंपनी की शुरुआत करने के लिए जरूरी है। गुड्स एंड सर्विस टैक्स की वेबसाइट से जीएसटीआईएन को हासिल किया जा सकता है।

बैंक लोन

अपनी कंपनी के लिए सामान खरीदने के लिए यदि आपके पास पैसे नहीं है तो आप किसी सरकारी या प्राइवेट बैंक से लोन ले सकते हैं। इसके लिए आपको अपनी कंपनी की पूरी डिटेल के साथ कुछ फॉर्म भरने होंगे।

मुद्रा लोन एप्लिकेशन के तहत आपको बिजनेस प्लान, पैन कार्ड या आधार कार्ड जैसे आईडी प्रूफ, बिजली का बिल या डोमिसाइल जैसे रेजीडेंस प्रूफ, नई फोटो, बिजनेस के लिए खरीदे जाने वाले उपकरण के कोटेशन, जहां से इन उपकरणों को खरीदना है, उस सप्लायर का नाम, टैक्स रजिस्ट्रेशन नंबर या लाइसेंस जैसे बिजनेस के प्रूफ से जुड़े डॉक्यूमेंट, यदि किसी आरक्षित सूमह से हैं तो उसका प्रूफ जैसे डॉक्यूमेंट्स की जरूरत पड़ती है।

प्रॉफिट (लाभ)

पैकर्स एंड मूवर्स का बिजेनस इन दिनों फायदे का सौदा है। यहां इतने लोग रोजाना एक शहर से दूसरे शहर मूव करते हैं कि औसत पर देखा जाए तो एक पैकिंग एंड मूविंग के काम में कुल कीमत का लगभग 30- 50 फीसद पैसा आपकी कंपनी का प्रॉफिट है।

यानी कि यदि आपको महीने में दस बुकिंग मिलती है और औसत तौर पर दस बुकिंग की कुल कीमत आप एक लाख रुपये ले रहे हैं तो आपके पास 40,000 तो जरूर बचेगा।

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