मुनाफे का सौदा है बर्तन का दुकान

बर्तन के व्यापार में कभी मंदी नहीं आती बाजार में इसकी मांग हमेशा बनीं रहती है. इस व्यापार में दुकान में माल की कमी हो सकती है लेकिन ग्राहकों की कोई कमी नहीं होती बर्तन की दुकान कम पूंजी निवेश में भी शुरु की जा सकती है बर्तनों की बिक्री सालों भर होती रहती है शादी विवाह के सीजन और दीपावली के समय बिक्री दोगुनी रफ्ता से बढ़ जाती है बर्तन का दुकान गांव या शहर कहीं भी शुरु किया जा सकता है

कैसे शुरु करें बर्तन की दुकान

सबसे पहले तो आपको यह तय करना होगा कि आप बर्तन का कैसा दुकान खोलना चाहते हैं बड़े स्तर पर लोकल स्तर पर अगर आप बड़े स्तर पर दुकान खोलना चाहते हैं तो इसमें आपको दुकान को शोरुम की शक्ल देनी होगी जाहिर है इसमें आपको बड़ा निवेश करना होगा

दुकान में बर्तनों की पूरी रेज तो होनी ही चाहिए, साथ ही साथ लाइटिंग की ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि बर्तनों पर लाइट पड़ते ही चमक दुकान के बाहर तक पहुंच जाए और ग्राहक आकर्षित होकर आपके दुकान तक पहुंच जाए

अगर आप छोटे पैमाने पर बर्तन के दुकान की शुरुआत करना चाहते हैं तो आपको दुकान की व्यवस्था ऐसी करनी होगी कि दुकान आकर्षक लगे बर्तनों को कायदे से सजा कर इस तरह से व्यवस्थित करें कि लोग खुद ब खुद दुकान की ओर चल कर आ जाएं

जगह का चयन

दुकान आप चाहें बड़ा खोले या छोटा, इसमें स्थान चयन का बहुत महत्व है इसलिए दुकान खोलने से पहले आप जगह का चयन अवश्य कर लें दुकान शहर या गांव के प्रमुख स्थान पर ही खुलना चाहिए, अन्यथा दुकान को जमने में परेशानी होगी दुकान ऐसी जगह पर होनी चाहिए, जहां लोगों का बड़ी संख्या में आवागमन हो जहां पर लोगों का ठहराव हो, इससे दुकान बहुत जल्द ही रफ्तार पकड़ लेती है

दुकान की रेंज सबसे जरुरी

वैसे तो बर्तन की दुकान में मुख्य रूप से स्टील के बर्तनों की ही बिक्री होती है लेकिन आया हुआ कोई भी ग्राहक लौट कर न जाए, इसके लिए कुछ अलग से रेंज भी रखना पड़ता है इससे लोगों में धारणा बनती है कि अमुक दुकान पर पहुंच जाएं तो हर धातु का बर्तन मिल जाता है 

सभी बर्तनों की सूची बना लें चम्मच से लेकर बड़े पतीले और ड्रम तक की रेंज आपके दुकान में मौजूद होनी चाहिए. हर आकार, हर वजन का सारा सामान आपके पास होना चाहिए, जो ग्राहक की डिमांड होते ही, उसके सामने पहुंच जाए इससे दुकान की छवि निखरती है

स्टील के अलावा पीतल और कांस्य के बर्तन भी साइड से रखें शादी, विवाह और पूजा पाठ जैसे मांगलिक कार्यों में इसी तरह के बर्तनों की मांग होती है इन बर्तनों में मुनाफा ज्यादा मिलता है अल्युमिनियम के बर्तनों की रेंज भी रखें टेंट हाउस वालों की जरुरत में अक्सर अल्युमिनियम के बर्तन ही आते हैं उन्हें स्टील और अल्युमिनियम दोनां धातुओं के बर्तनों की जरुरत होती है

दुकान की छवि इस तरह की बनाएं कि ग्राहकों को ये उम्मीद रहे कि आपके यहां जाने के बाद उसे किसी सामान के लिए बाजार में भटकना नहीं पड़ेगा अपने दुकान में हर कीमत के बर्तन भी रखें. बहुत सारे लोग शादी, विवाह, जन्मदिन जैसे उत्सवों में भी उपहार के तौर पर बर्तन भेंट देते हैं भेंट देने के लिए लोग कम कीमत वाले ही सामान की मांग करते हैं

कहां से करें खरीदारी

अगर आप छोटे पैमाने पर बर्तन की दुकान शुरु कर रहे हैं तो आप अपने आस पास के किसी थोक दुकानदार से संपर्क कर सकते हैं. थोक दुकान से आपको उधार में भी माल मिल सकता है. अगर आपको बड़े पैमाने पर दुकान की शुरुआत करनी है तो आपको वैसे शहरों से कारोबार करना पड़ेगा, जहां इन बर्तनों का उत्पादन होता है

देश का सबसे बड़ा स्टील का बाजार मुंबई के भुलेश्वर में है. इसे भारत का ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया का सबसे बड़ा स्टील बाजार कहा जाता है. भारत के बाकी शहरों के स्टील बाजारों की अपेक्षा यहां के बर्तनों की कीमतों में 30 फीसदी तक की कमी रहती है इसके साथ ही भुलेश्वर बाजार में आपको जितना रेंज मिल जाएगा, शायद ही उतना किसी दूसरे बाजार में मिल सके

इसके अलावा हरियाणा के जगाधरी और यूपी के मुरादाबाद से भी बर्तनों का बड़े पैमाने पर कारोबार होता है दिल्ली के डिप्टीगंज में बर्तनों की बहुत बड़ी मंडी है, जहां से पूरे भारत में माल सप्लाई किया जाता है. डिप्टीगंज में नए नए डिजाइनों वाले बर्तनों की भरमार रहती है. इसे अपने शहर में बेच कर आप अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं

डिजायनर बर्तनों को भी बनाए दुकान का अंग

आजकल ग्राहकों को स्टील के बर्तनों के बीच गोल्ड पॉलिश की डिजाइन वाले बर्तन खूब भाते हैं और वह उसकी डिमांड भी करते हैं इसके साथ ही चांदी की पॉलिश वाले बर्तन भी लोग हाथों हाथ ले रहे हैं गोल्डेन और सिलवर पॉलिश की वजह से बर्तनों की खूबसूरती बढ़ जाती है और ये ग्राहकों के आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं

सप्लाई का भी करें इंतजाम

नए साल, दीपावली या वार्षिकोत्सव के दौरान सभी कंपनियां, ऑफिस, शोरुम, कॉरपोरेट ऑफिस में कर्मचारियों को उपहार देने का रिवाज है अक्सर ऐसे समय में बर्तन ही उपहार में दिए जाते हैं, जो कर्मचारियों के काम आते हैं कर्मचारियों को देने के लिए कंपनी वाले बाजार के थोक दुकानों का सहारा लेते हैं, जहां से उन्हें माल खरीद कर और फिर पैकिंग कराना पड़ता है. इसके बाद ऑफिस मंगा कर देना होता है.

बर्तन दुकान के लिए जरुरी टिप्स

आप ऐसी कंपनियों या संस्थानों से संपर्क कर सकते हैं और उनसे बर्तन सप्लाई का काम ले सकते हैं अगर उन लोगों को एक बार आपके माल की क्वालिटी और उसका रेट पसंद आ गया तो फिर हर साल वो आपसे ही संपर्क करेंगे

बर्तन दुकानों में अक्सर तौल कर सामानों की बिक्री होती है, इसलिए तौलने वाली मशीनों को दुरुस्त रखें उनसे कभी कोई छेड़छाड़ न करें थोड़े से लालच के चक्कर में आपके दुकान की प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है

दीवाली और शादी विवाह के सीजन के पहले पैसों का इंतजाम कर लें और दुकान में नए माल लगाएं बर्तन दुकान शुरु करने से पहले लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन अवश्य कर लें जीएसटी नंबर भी लेना अनिवार्य है कागजी कार्यवाही में कोई कोताही न बरतें

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