बकरी पालन व्यवसाय कैसे शुरू करें जानें पूरा तरीका (bakri palan) Goat Farming In Hindi

बकरी पालन व्यवसाय कैसे शुरू करें | बकरी पालन से कमाई की पूरी जानकारी 

बकरी पालन भारतीय समाज का बहुत ही पुराना व्यवसाय रहा है बकरी पालन को सदैव किसानी से जोड़ कर देखा जाता रहा है जो भी किसानी करता है वो साथ-साथ बकरी पालन भी करता ही है लेकिन किसानी करने और बकरी पालन में काफी अंतर है दोनों ही अपने-अपने स्तर पर अलग-अलग प्रशिक्षण के माध्यम से मुनाफे की लागत तक पहुँचते है

अगर हम बात करें ग्रामीण रोजगार की तो यहां आपके लिए एक बेहतर विकल्प है गोट फार्मिंग यानी कि बकरी पालन,आपको नाम सुनकर थोड़ा अजीब लग सकता है लेकिन जब आप इसके फायदे जानेंगे तो आप अपनी सोच बदल देंगे ,क्योंकि आज सफलता की दौड़ में सब एक दूसरे से आगे निकलना चाहते हैं वही बकरी पालन आप सब के लिए एक अच्छा उपाय साबित हो सकता है ,लेकिन आपको इसके लिए गंभीर होना होगा और मेहनत के साथ समय भी देना होगा।

बकरी पालन के फायदे –

बकरी पालन के अनेक फायदे हैं जिससे हमें अच्छा पैसा मिल सकता है।

यह कम व्यय में एक समयावधि में अच्छा व्यापार साबित हो सकता है।

बकरी पालन से हम दूध ,मांश ,खाल प्राप्त कर सकते हैं।

सरकार भी ऐसे फार्मिंग के लिए अनेक प्रकार की आर्थिक और तकनीकी सहायता देती है।

कुछ समय बाद जब आपकी बकरियां बच्चे देने लगेंगी उसके बाद आपका व्यापार बड़ा होने लगेगा लेकिन इसके लिए मेहनत और धैर्य की आवश्यकता है।

बकरी के दूध से अनेक दवाएं बनती है जिससे बकरी के दूध की मांग सदैव ही बनी रहती हैं।

बकरी के दूध में प्लेटलेट्स की मात्रा जल्दी से बढ़ाने का गुड़ मौजूद होता है।

बकरी पालन व्यवसाय शुरू करने से पहले क्या योजना की आवश्यकता है

आप निम्नलिखित बिन्दुओं पर विचार करके सही योजना बकरी पालन के लिए बना सकते हैं: 

1) स्थान का चयन जहां आप एक बकरी फार्म शुरू करने का सोच रहे हैं – 

बकरी पालन शुरू करने के लिए सब से पहला कदम होता हैं सही जमीन या स्थान का चुनाव करे जहां आपको अपनी बकरी फार्म खोलना हैं ऐसे तो आप बकरी फार्म कही भी खोल सकते हैं बकरी फार्म अगर सहर से दूर गाँव के इलाके में खोलते हैं

जहां आस पास हरा भरा खुला मैंदान और बकरी को चराने वाली जगह हो जहां आप अपने बकरियों को रोज हरा चारा भी खिला सके जहां सुध हवा स्वच्छ पीने का पानी  हो ताकि बकरी की खाने पीने में जो खर्चा होता हैं वो आपका कम से कम हो और आपको ज्यादा फ़ायदा मिल सके अपने बकरी फार्म व्यवसाय से | 

जिस जगह आप फार्म खोलना चाह रहे हैं उस जगह को पूरी तरह से बाउंडरी करवा दे ईंट और सीमेंट की बाउंडरी करवाए ताकि यह आपके बकरी फार्म के लिए ज्यादा सुरक्षित रहेगा जब आपने बाउंडरी करवा लिए हो तब आपको बकरी शेड का निर्माण करना होगा

मेरा भी एक खुद का बकरी फार्म हैं जो सिर्फ 20 डिसमिल का हैं जिसमें मेंने 15 डिसमिल में बकरी पालन के लिए शेड बनवाया हैं और जो बाकी 5 डिसमिल बचा वो मेंने उसमे एक रूम बनवा दिया हैं वहां रहने वाले बकरियों को देख भाल करने वाले के लिए हैं शुरू के दिनों में मेरे पास सिर्फ 5 बकरिया थी और 2 बकरा आज के दिनों में वो बढ़ कर 35 हो गये हैं अगर आप सही तरीके से देख भाल करेंगे तो इससे भी ज्यादा आपके पास हो सकता हैं 

2) बकरी शेड निर्माण योजना करे –

जब आपने बकरी फार्म के लिए सही स्थान का चुनाव करलिए तो अब आपको बकरी की शेड का निर्माण करने का योजना बनाना होगा की बकरियां कैसे सुरक्षित पल सके इसके लिए आपको एक अच्छा साफ,स्वच्छ शेड की आवश्यकता होगी बकरी के शेड बनाने के 2 प्रकार होते है

एक जमीन पर और जमीन से कुछ उंची पे दोनों में फर्क यह हैं की अगर आप जमीन से ऊंची शेड बना रहे हैं उसका लागत थोड़ा ज्यादा आता हैं और जो शेड जमीन पर बना रहे हैं उसका खर्च थोड़ा कम होता हैं लेकिन जो शेड जमीन के उप्पेर बनाया जाता हैं उसका फ़ायदा बहुत ज्यादा होता हैं

बकरी का शेड बनवाना आप के एरिया पर निर्भर होता हैं अगर आपके एरिया में बारिश यह सर्दी ज्यादा हैं तो आपको जमीन के उपर ही शेड बनवाना चाहिए अगर आपके जगह में बारिश यह सर्दी कम रहती हैं तो आप जमीन पे भी शेड बनवा सकते है यह सब चीज़ आप पर निर्भर है आपको कैसे बनवाना हैं

जमीन के उपर शेड बनवाने से बकरी जो बीमार होती हैं वो भी बहुत कम हो जाता हैं वही अगर आप जमीन पर शेड बनवाते हैं तो बकरियों का बीमार होना का ज्यादा डर होता हैं जो सफ़ाई हम जमीन के उप्पेर वाले शेड में रख सकते हैं उतना सफ़ाई हम नीचे नहीं रख सकते हैं तो यह हैं इन दोनों का फर्क 

कोन सा शेड का निर्माड करे…कुछ बातों का अवश्य ध्यान रखें?  

यह बात बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण हैं आपका बजट कितना है आपके पास शेड बनाने के लिए कितना पैसा हैं अगर बजट काम हैं आप छोटे तोर पर बकरी पालन शुरू करने की सोच रहे है तो आप जमीन पर ही शेड बना सकते हैं अगर आपके पास बजट ज्यादा हैं तो आप high quality वाला शेड बनाये जो जमीन के उप्पेर बनता हैं 

1) बकरियों का शेड बनाते समाये यह भी सही से धयान रखे की शुद्ध हवा आने जाने के लिए कोई जगह खुला हो ताकि बकरियों को शुद्ध हवा हमेशा मिलते रहे

2) शेड बनाते समाये बकरियों के लिए शुद्ध पीने का पानी के लिए भी सही व्यवस्था रखे उसके लिए आप अपने जमीन में एक बोरिंग करवा ले ताकि बकरियों को हमेशा शुद्ध पानी मिलता रहे

3) बकरियों के घर में पानी निकलने का उचित व्यवस्था रखे ताकि जब भी आप अपनी बकरी शेड की सफाई करे तो  बकरियों का मल-मूत्र और पानी आराम से शेड से बहार निकल जाये  उसके लिए जमीन थोड़ी ढाल बनवा दे

4) बकरी घर की दाहिने बाई और पीछे की दीवार की लम्बाई कम से कम 15 फिट का रखे और दीवार उसकी 10 इंच मोटी बनवाये ताकि शेड के अंदर का तापमान Normal रहे शेड का छत एल्बेस्टर का बनवा ले यह सस्ती और अच्छी होती हैं

5) शेड के अंदर 3 भाग बनवाये ताकि बकरी बकरा और छोटे बच्चे सब अलग अलग रहे

6) शेड में खाने पीने वाले बकरियों के बर्तन की हमेशा साफ़ सफाई करते रहे ताकि बकरियों को बिमारी से बचाया जा सके 

7) बकरियों की रहने की जगह शहर से काफी दूरी पर होना चाहिए 20 बकरियां होतो एक एकड़ की जमीन काफी है  बकरियों की रहने की जगह पर हरे चारा की उत्पत्ति का साधन होतो काफी फायदेमंद और मुनाफा भरा रहेगा इससे कम खर्चे में बकरियों को पोष्टिक चारा मिलेगा .

3) बकरी पालन व्यवसाय के लिए बकरी की सही नसल का चुनाव करे (Goat bread selection) 

जब आपने बकरी फार्म के लिए सही स्थान चुन कर बकरी का शेड बनवा चुके हैं तो अब आपको बकरी की सही नस्ल चुन कर बकरी पालन का व्यवसाय शुरू करना होगा दोस्तों भारत में कई तरह की नस्ल की बकरी पाई जाती हैं कोई दूध और कोई मांस के लिए पहचानी जाती हैं लेकिन हमें वो नस्ल की बकरी का चुनाव करना होगा जो दूध और मांस दोनों के लिए इस्तेमाल में लाई जाती हैं  

हर कोई नस्ल की बकरी लाभदायक नहीं होती हैं सही नस्ल की बकरी के चुनाव के लिए हमें सब से पहले यह बात ध्यान रखना हैं की हम जिस जगह में रहते हैं वहाँ का वातावरण कैसा है उस जगह के वातावरण का मूल्यांकन कर लेना बहुत आवश्यक है तभी इस बात की जानकारी होगी की विभिन्न वातावरण में कौन-कौन सी नस्ल की बकरियां पाली जा सकती है

कुछ नस्ल की बकरियां दूसरे जगह यह वातावरण में नहीं रह पाती हैं जैसे की अगर आप पंजाब में रहते हैं तो वहां आपके लिए बीतल (Beetal) बकरी का चयन सब से लाभदायक होगा यह सब को ध्यान में रख के चुनाव करे ताकि बिजनेस में ज्यादा से ज्यादा मुनाफा मिल सके 

भारत में कुछ महत्वपूर्ण बकरियां पाई जाती हैं जैसे की: 

1) जमुनापारी (jamunapari)
2) सिरोही (sirohi)
3) बर्बरी (barbari) 
4) बोअर (Boer)
5) सुरति (Surti)
6) बीतल (Beetal)
7) ओस्मनाबादी (Osmanabadi)
8) झाकरण (Jhakrana)
9) सोजत (Sojat)
10) ब्लैक बंगाल (Black bengal) 

Imp Note : बकरियों के नेसल के बारे में अधिक जानकारीके लिए यहाँ से पढ़े

बकरियों का चारा –

अब बात आती है बकरियों के खाने की ,जहां हम बात करेंगें की बकरियों को अच्छी सेहत के लिए खाने में क्या देना चाहिए।

बकरियों को खाने में अच्छा भूसा देना चाहिए और साथ मे बकरियों के दाने का प्रयोग करें।

बकरियों को दिन के समय खेत या फार्म पर घास खिलाने के लिए ले जाना चाहिए जिससे उन्हें हरी घास भी मिलेगी और उनके चलने से पैर और शरीर को मजबूती मिलेगी।

बकरियों के भोजन में हर रोज हरे चारे का प्रयोग उनके पाचन और स्वाथ्य को अच्छा करता है।

बकरियों को ज्यादा मात्रा में अनाज खिलाने से बचें।

अच्छे पाचन के लिए बकरियों के भोजन में पाचन चूर्ण का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

खाने के साथ बकरियों को आवश्यकता अनुसार पानी भी पिलाना भी जरूरी होता है।

हर बकरी को 5-15 लीटर पानी हर रोज पीना होता है।

बकरियों के प्रजजन का सही समय –

बकरियों को 15 से 18 माह की आयु में गर्भित करना ठीक होता है अच्छी देखभाल से इस आयु तक बकरियों का वजन 21 से 24 किलो के बीच हो जाता है कम वजन की बकरियों का गर्भित होना हानिकारक माना जाता है, इस वजह से गर्भित काल में बकरी और उसके गर्भ में पल रहे बच्चों की मृत्यु की ज्यादा संभावना रहती है

बकरी जब गर्म होने लगे तो उसे 12 से 24 घंटे के भीतर बकरे के पास छोड़ देना चाहिए, जिससे बकरी को गर्भ धारण करने में आसानी होती है बकरियां 6 से 7 माह में बच्चे पैदा करती है और एक साथ बकरियां 2 से 3 बच्चे पैदा करती है

बकरियों का टीकाकरण ( Vaccination)

बकरियों को रोगमुक्त रखने के लिए उसे समय-समय पर टीकाकरण और डीवॉर्मिंग जरुर करवाते रहना चाहिए पैर और मुहं के रोग में (एफएमडी), गोट प्लेग के रोग (पीपीआर), हेमोरेगिक सेप्टिसेमिया (एचएस), एंथ्रेक्स, गोट पोक्स से संबंधित टीकाकरण और डीवोर्मिंग समय-समय पर कराते रहना चाहिए , जिससे बकरियां सामान्य रूप से अपना विकास कर पाए और हष्ट-पुष्ट रहे

बकरियों की बीमारियां-

जैसे कि बीमारियां इंसानों में पाई जाती हैं ऐसे ही बकरियों में भी बीमारियां हो जाती हैं जो जीवाणु या वायरस के द्वारा हो सकती हैं जिनमे से कुछ खाश बकरियों की बीमारियां निम्न हैं-

1) निमोनिया या जुकाम

बकरियों में सर्दी अधिक ही जाती है जिससे उन्हें निमोनिया या जुकाम हो सकता है या हल्का जुकाम बाद में निमोनिया का रूप ले सकता है ऐसे में उनमें निम्न लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं जैसे – नाक बहना ,खाँसना ,छींकना या मुह खोलकर सांस लेना ,नाक से तरल का बहना आदि।

उपचार- एंटीबायोटिक 3-5 ml 5 दिन तक दे सकते हैं

2) आफरा

इस रोग के कारण मुख्यतः बकरियों में पेट फूलना,पेट दर्द करना ,जुगाली न करना ,सांस लेने के तकलीफ होना आदि लक्षण आ जाते हैं जिसके लिए उन्हें सही उपचार देना जरूरी होता है।

उपचार-इसके लिए बकरियों को खाने का सोडा 10-20 ग्राम देना चाहिए ठीक न होने पर डॉक्टर से परामर्श लें।

3) खुरपका /मुंहपका

इस रोग में बकरियों के मुंह और खुर(पंजो)के छाले हो जाते हैं जिससे उन्हें चलने और खाना खाने में तकलीफ होती है और बे उच्चताप आदि की शिकार हो जाती हैं, बे जुगाली भी नही कर पातीं।

उपचार-इसके लिए बकरी के पैर को डेटॉल से धोएं और फिर लोरेक्सन लगाएं,बुखार के लिए डॉक्टर से सम्पर्क कर इंजेक्शन लगबाएँ।

4) दस्त-

इसमें बकरी को मल काफी पतली और तरल रूप में बार-बार आते हैं जिससे बकरियों का शरीर कमजोर हो जाता है। उपचार-इसके लिए उन्हें 15 से 20 ग्राम नेबलोंन पाउडर दिया जा सकता है अथवा डॉक्टर से तुरंत सम्पर्क करें।

बकरियों की साफ-सफाई-

बकरीपालन में साफ-सफाई का अच्छा ध्यान रखना होता है ,जैसे कि उनके मल और मूत्र को साफ कर उनको एक अच्छा वातावरण देंना।सारी बकरियों को समय-समय पर नहलाना भी चाहिए। महामारी के समय सभी बकरियों को बैक्सीन भी लगवाना चाहिए।

बकरी पालन में जरूरी बातें –

सर्वप्रथम आपको बकरी पालन के लिए ट्रेनिंग की आवश्यकता होगी जिससे आप आधुनिक तरीकों से कम लागत में अधिक मुनाफा ले सकते हैं,कई प्राइवेट और सरकारी संस्थाएं इसके लिए कार्यरत है लेकिन आपको इसके लिए कुछ पैसे भी खर्च करने पड़ सकते हैं।

ट्रेनिंग के बाद आपको जरूरत होगी भूमि की जहां आप बकरी पालन करना चाहते हैं ,लेकिन आप बकरी पालन कि भूमि सुनिश्चित करने से पहले ये देख लें कि भूमि नम न हो और शहर या गावँ से थोड़ी दूरी पर हो तो ज्यादा अच्छा रहेगा।

अब आपको जरूरत होगी एक अच्छी शेड की जहां पर बकरियां सुरक्षित रह सकें ,शेड को बनाबाते समय ये ध्यान रखें कि हर एक बकरी को रहने के लिए उपर्युक्त स्थान मिल सके।

बकरियां भले ही कम रखें लेकिन अच्छी नस्ल की रखें जिससे आपको मांश और दूध प्राप्त हो सके,एक शेड में एक नस्ल की बकरियां रखना ही ठीक होगा।

आप छोटे मेमनों अथवा बड़ी बकरियों को खरीद सकते हैं,मादा मेमनों को खरीदने से आपको इंतजार ज्यादा करना पड़ेगा।

आप शुरु में 10 से 20 बकरी रख सकते हैं जिससे देखभाल में आसानी हो, बाकी बाद में ज्यादा खरीद सकते हैं या प्रजनन से प्राप्त कर सकते हैं।

बकरी पालन शुरू करने में कुल खर्च कितना होगा

शेड निर्माण में 30 बकरियों के रहने के लिए लगभग 50 हजार रुपए।
हर वर्ष 30 बकरियों के भोजन के लिए 30000 रुपए लगभग हो।
बकरियों की दबाओं औऱ बैक्सीन के लिए 20000 रुपए।
पानी ,विजली और अन्य खर्च एक साल का लगभग 30000 रुपए।
अर्थात कुल सामान्यतः 30 बकरियों को रखने के लिए 1 से 2 लाख रुपए आसानी से खर्च हो सकते हैं।
आप अगर कामों के लिए नौकर रखते हैं तो खर्च 1-2 लाख हर साल ज्यादा हो सकता है।

बकरियों को बेच कर ज्यादा से ज्यादा पैसा कैसे कमाया जाए ?

बकरी अथवा उसके दूध को बेचने के लिए आपको अपने आसपास अच्छे बाजार को तलाशना होगा जहां आप अपनी बकरियों अथवा दूध को बेंच पाएं,आप चाहे तो आप दूध के लिए किसी डेयरी से भी बात कर सकते हैं,बकरियों को उनके बजन के अनुसार बेंचे ताकि लाभ अधिक हो ,यहां किसी दलाल या विचौलिए से बचके रहें,आमतौर पर एक 30 किलोग्राम के मादा बकरे का मूल्य 7000 या अधिक होता है इस हिसाब से यदि हर साल 20 बकरियों से 10-12 बकरे प्राप्त होते हैं तब 7000×12 =84000 रुपए होते हैं जो हर साल बढ़ती रहेगी और आपके दूध का विक्रय अलग होता ही रहेगा साथ ही नई मादा बकरी भी बढ़ती रहेंगी।

बकरी पालन शुरू करने के लिए सरकारी मदद-

सरकार छोटे उधोगो के लिए काफी प्रयत्नशील नजर आ रही है,बकरी पालन में आप सरकार की मदद भी ले सकते है जहां आपको सस्ती दरों में लोन मिलेगा और साथ ही उपकरणों में भी छूट मिलती है।

पंजीकरण-आप सरकारी पंजीकरण के लिए किसी जन सेवा केंद्र पर जा सकते हैं या स्वमं ही udyogaadhar.gov.in पर जाकर ऑनलाइन रजिस्टर कर सकते हैं जहां आप उपर्युक्त जानकारी भर कर सबमिट कर दें इसके बाद आपको एक सर्टिफिकेट दे दिया जाएगा।

ध्यान रखने के तथ्य-

आपको हमेशा ध्यान रखना होगा कि कोई भी बकरी किसी प्रकार से शान्त या अस्वस्थ नजर आ रही हो तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।

बकरियों की जुगाली का बेहतर ध्यान रखें जुगाली न करने पर डॉक्टर से सम्पर्क करें।

जिस बकरी का स्वास्थ्य ठीक न लगे उसे बाकी बकरियों से अलग रखना चाहिए।

बकरियों के लिए तापमान (सर्दी, गर्मी) का आवश्यक ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

समय-समय पर बकरियों को नहलाना चाहिए।

बकरियों को समय-समय पर बैक्सीन और जूं से बचने के लिए दबाई लगानी चाहिए।

बकरी पालन प्रशिक्षण ( Traininng )की जानकारी यहाँ से पढ़े

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