मधुमक्खी पालन व्यवसाय की जानकारी | Honey Bee Farming Business in Hindi

मधुमक्खी पालन है लाभ का व्यवसाय कैसे शुरू करें पूरी जानकारी

मधुमक्खी पालन अंग्रेजी में कहें तो (Apiculture) इसे हम कृषि का हिस्सा माने तो कोई गलत नहीं होगा। भारत में पहले यह मधुमक्खी पालन का कार्य ऊंची जगह वाले राज्यों में होता था, पर अब भारत के कई राज्यों में मधुमक्खी पालन होने लगा। हो भी क्यों ना क्योंकि इसमें कम खर्च और अधिक मुनाफ़ा होता है, और इससे और भी कई फायदे है।

खाद्य पदार्थों के उद्योग अच्छे मुकाम पर है। कई खाद्य पदार्थ हमें जीवों से भी प्राप्त होते हैं जिनकी मांग हमेशा ही बनी रहती है। जैसे मधुमक्खी से प्राप्त शहद। आप भी अच्छे से जानते हैं कि हमारे शहद क्या-क्या काम आता है। शहद से कई दवाएं तैयार की जाती है। इसके अलावा सेहत को सुधारने के लिए भी शहद का उपयोग लगभग सभी घरों में किया जाता है। इतना ही नहीं कई लोग तो शहद के स्वाद के दिवाने होते हैं। इस उत्पाद की मार्केट में अच्छी खासी मांग है। ऐसे में आप शहद का प्रोडक्शन करके अपना एक बिजनेस शुरू कर सकते हैं।

मधुमक्खी का पालन आप किस तरह से कर सकते है, क्या क्या चीजों की आवश्यकता पड़ेगी, यह सब आप जानेंगे आज इस आर्टिकल में तो इस आर्टिकल को पूरा अंत तक पढ़ें।

मधुमक्खी पालन का इतिहास

मधुमक्खी पालन की प्रक्रिया काफी प्राचीन समय से चल रही है, दुनिया का पहला मीठा चखने वाला पदार्थ शहद ही था। हमारे पूर्वज जो पहले गुफाओं और जंगलों में रहते थे, तब से शहद का चलन चल रहा है। पुराने समय में अच्छी तरह से ज्यादा मात्रा में शहद नहीं प्राप्त कर सकते थे। केवल पेड़ों पर लगी शहद को ही प्राप्त कर सकते थे, आज भी कई जगह पुरानी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। पुरानी तकनीक में मधुमक्खियों को छत्ता छोड़ने का इंतज़ार करते है, या फिर धुएं से उनको उड़ाते है, फिर छत्ते को निचोड़ के या फिर आग में गर्म करके शहद निकाला जाता है, और बाद में उसे कपड़े में छान लेते है। इस तकनीक से शहद तो मिल जाती है, पर उसमें धूल मिट्टी मिल जाती है साफ शहद नहीं मिल पाती, और बाजार में उसको दाम भी अच्छा नहीं मिल पाता, एक और नुकसान यह भी होता है कि वो मधुमक्खियां हमेशा के लिए चली जाती है, और उसी जगह वापस छत्ता नहीं बनाती। तो कैसे करें ? आधुनिक तरीके से मधुमक्खी पालन, यह हम इस आर्टिकल में आगे जानेंगे।

अलग अलग प्रकार की मधुमक्खियां

भारत में मुख्यतह पांच प्रकार की मधुमक्खियां व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल की जाती है।

1. एपिस सेराना इन्डिका (इंडियन हाइव बी)

यह एक बार में एक से दो किलो तक शहद बनाती है, इससे हम एक साल में 10 से 15 तक शहद प्राप्त कर सकते है। इस मधुमक्खी को सतकोचवा मधुमक्खी भी कहा जाता है, इसका कारण यह है क्योंकि यह पेड़ पर या दीवार पर एक के बाद एक ऐसे सात छत्ते एकसाथ बनाती है। इसे हम पेटियों में भी पाल सकते है।

2. एपिस फ्लोरिया (ड्वार्फ बी)

इस प्रजाति की मधुमक्खी से एक बार में 250 से लेकर करीब 1 किलो तक शहद प्राप्त होती है। यह छोटी मधुमक्खियां होती है जो छोटे छत्ते बनाती है, इसके छत्ते आमतौर पर पेड़ों से लटकते हुए दिखाई दे जाते है।

3. एपिस डोरसॅटा (रॉक बी)

ये मधुमक्खियों में सबसे प्रसिद्ध प्रजाति है, और सबसे ज्यादा शहद भी इसी प्रजाति की मधुमक्खियां देती है। यह बहुत खतरनाक होती है, इसलिए इनका पालन नहीं हो सकता। इनका शहद जंगल से लिया जाता है। बड़े बड़े पेड़ों पर बहुत बड़े बड़े छत्ते बनाती है, आपने जो पेड़ों पर बड़े बड़े छत्ते देखे है, वो सब यही बनाती है। इससे एक बार में ही करीब 30 से 50 किलो तक शहद मिल सकता है।

4. टेट्रागोनुला इरिडीपेनिस (डामर या स्टींगलेस बी)

यह मधुमक्खी शहद बहुत ही अधिक कम मात्रा में देती है, इससे एक बार में एक छत्ते से केवल 100 ग्राम के लगभग ही शहद मिलता है।

5. एपिस मेलिफेरा (यूरोपीय या इतालवी मधुमक्खी)

हमारे देश में इसी मधुमक्खी का पालन होता है, इसको पेटी में पाल सकते है। इसके छत्ते से एक बार में करीब 25 किलो से लेकर 40 किलो तक शहद प्राप्त कर सकते है।

मधुमक्खी पालन व्यवसाय के लिए क्या-क्या चाहिए 

सबसे पहले आपके किसी खूले स्थान का चयन करना होगा जहां आप मधुमक्खियों को सुरक्षित रख सकें। जमीन आपको आपकी मधुमक्खियों के अनुसार लेनी होगी। 150 से 200 मधुमक्खियों की पेटी रखने के लिए आपको कम से कम दो से ढाई हजार square फिट की जमीन लेनी होगी। इसके बाद आपको ऐसी विदेशी मधुमक्खियां खरीदनी होगी जिनसे अच्छे खासे शहद का प्रोडक्शन हो सके। ये मधुमक्खियां आपको पेटी के हिसाब से मिलती है। अच्छे शहद के प्रोडक्शन के लिए आप एपिस मेलीफेरा, एपिस फ्लोरिया, एपिस इंडिका और एपिस डोरसाला आदि प्रजाति की मधुमक्खियां खरीद सकते हैं, क्योंकि इनसे आप अच्छी मात्रा में शहद प्राप्त कर पाएंगे।

मधुमक्खियां आपको प्रति पेटी चार हजार रुपये तक मिलेगी, जिनमें तीन सौ के आस-पास मधुमक्खियां होगी। अब आपको कुछ संसाधन भी जुटाने होंगे जिनमें चाकू, ड्रम, रिमूविंग मशीन, और हाथों में सुरक्षा के लिए दस्ताने आदि की व्यवस्था करनी होगी। आपको शहद निकालने की मशीन 25 हजार तक मिल जाएगी। इसके बाद कुछ सामान्य संसाधन और जुटाने होंगे जिनके बारें में आप स्वयं भी जानते ही हैं।

कैसी जगह चुने मधुमक्खी पालन के लिए

मधुमक्खी पालन करने के लिए मुख्य चीज है जगह, सबसे पहले जगह की आवश्यकता होगी। ऐसी जगह पर मधुमक्खियों का पालन करना चाहिए, जहां का वातावरण अच्छा हो, सुखी जगह हो। आसपास अच्छे पेड़ पौधे हो, साफ पानी (प्राकृतिक या आर्टिफिशियल) भी आसपास होना चाहिए, जिससे हमको अच्छी शहद प्राप्त होगी। आसपास फसल लगी हो तो और अच्छा रहेगा मधुमक्खियों को शहद लाने के लिए ज्यादा दूरी तय नहीं करना पड़ेगा, इससे शहद की क्वालिटी भी काफी अच्छी रहेगी।

मधुमक्खी पालन के लिए किस प्रजाति की मधुमक्खी का चुनाव करें

हमारे देश में मधुमक्खियों की कई प्रजातियां मौजूद है लेकिन मधुमक्खी पालन के लिए कुछ प्रजाति की मधुमक्खियां ही पालन के लिए इस्तेमाल में लाई जाती है एपिस मेलीफेरा मधुमक्खी उनमे से एक है इन्हें आप आसानी से पाल सकते है और सब से अच्छी बात तो यह है की एपिस मेलीफेरा मधुमक्खी एक बॉक्स से साल भर में 70 से 80 किलो शहद दे सकती हैं अपने मधुमक्खी फार्म में इस प्रजाति की मधुमक्खी पालन करे क्यकि की यह मधुमक्खियां सबसे ज्यादा सहद और अंडे देने वाली प्रजाति है इस प्रजाति की पालन करके आपको सब से ज्यादा लाभ हो सकता है

मधुमक्खी पालन की प्रक्रिया

वैसे तो मधुमक्खी पालने का सही समय नवंबर से जनवरी के बीच माना जाता है, सबसे पहले पेटियों को जगह पर रख दें, पर ध्यान रहे सारी पेटियां जमीन से कम से कम 6 इंच ऊपर रहनी चाहिए, ताकि वो मौसम की मार से बच सकें। पेटियों के अंदर जाली रहती है, जहां पर मधुमक्खियां शहद बनाती है। पेटी के अंदर आप मधुमक्खियों के लिए खाना भी रख सकते हो, यदि शहद कम मात्रा में आए तब ही, चीनी को उबाल के पेटी के अंदर रखें, इससे शहद की क्वालिटी अच्छी आएगी।

शहद निकालने की प्रक्रिया

हर 5 से 6 दिन के बाद पेटियों में से शहद को निकालना है। यह फिर मधुमक्खी के छत्ते शहद से पूरी तरह भर जाएं तो आप समझ जाएं कि आपके शहद निकालने का वक्त आ गया है। कई लोग हाथों से भी शहद निकालते हैं लेकिन हमने आपको शहद निकालने की मशीन के बारें में बताया (honey extractor) नाम की मशीन जिनसे आप शहद निकाल सकते हो। उसके माध्यम से ही निकालना है, क्योंकि आपको पूरी सुरक्षा का ध्यान रखना है।

जब मधुमक्खियां पेटी में ना हो तब आपको शहद के छत्तों को चाकू से सावधानी पूर्वक निकालना होगा। उसके बाद में बहुत ही सरल प्रक्रिया है। आपको मशीन में कुछ खांचें नजर आएंगे आप उन खांचों में अच्छी तरह इन छत्तों को जमाना है, जिनमें शहद भरा हुआ है। ऐसा करने के बाद आपको मशीन ON करनी है, बड़ी आसानी से शहद निकल जाएगा और उसे ड्रम में डाला जाता है, और 24 घंटे तक एक निश्चित् तापमान पर् रखा जाता। उसके बाद वो उपयोग के लिए तेय्यार होता है वहां से फिर उसको जैसे पैक करना चाहो वैसे पैक कर सकते है

मधुमक्खी पालन करने के लिए सही समय

मधुमक्खी पालन करने के लिए सब से अच्छी समय नवंबर से जनुअरी के बिच होती है इससे पहले ही आप अपने मधुमक्खी फार्म में सभी चीजों की व्यवस्था करले और सही समय आने पर मधुमक्खी पालन करना शुरू कर दे इसके अलावा आप यह भी ध्यान रखे की मधुमक्खी पालन आप उस जगह में करे जहां आस पास अच्छी खासी हरियाली और फूले हो क्युकी मधुमक्खियां को शहद बनाने के लिए फूलों की अवयस्कता होती वो जितना फूल का रस पीयेगी उतना ही अधिक शहद हमें प्राप्त होगा

कहां से लायें मधुमक्खियां

मधुमक्खी पालन के लिए आप मधुमक्खियां उनसे ले सकते है, जो इन्हें पालने का काम करते है। वो आपको पूरी पेटी सहित मधुमक्खियां बेचते है। एक पेटी करीब 2 से 3 हजार रुपए के बीच आती है मधुमक्खियों सहित। या फिर आप कृषि विभाग केन्द्र जो कि सरकार द्वारा संचालित होते है, वहां से भी मधुमक्खियां खरीद सकते है।

कैसे करें मधुमक्खी के परिवार का विभाजन

मधुमक्खी पालन करते समय एक पेटी में केवल एक ही रानी मधुमक्खी होती है और केवल वही उस पेटी के अंदर अंडे देती है। यह दूसरी मधुमक्खियों के आकार में बड़ी और चमकीली होती है, यह झुंड में आसानी से पहचानी जा सकती है। ड्रोन यानी कि नर मधुमक्खी की संख्या घटती बढ़ती रहती है, इनका संख्या प्रजनन काल में बड़ जाती है। इनका मुख्य काम रानी मधुमक्खी को गर्भधारण कराना होता है।

वर्कर बी यानि कि ऐसी मधुमक्खियां जो फूलों से रस लेकर आती है, शहद बनाती है, अंडे और बच्चों की देखभाल करती है, और छत्ते भी यही बनाती है।अनुकूल मौसम में जब मधुमक्खियों का प्रजनन बड़ जाता है, उस समय एक पेटी में मधुमक्खियों की संख्या बहुत अधिक बड़ जाती है, और वो वहां अच्छे नहीं रह पाती, और बहुत सारी तो वो पेटी छोड़कर भी भाग जाती है। ऐसे समय मधुमक्खियों का विभाजन करना होता है, जिससे वो आराम से रह पाए। विभाजन के लिए उन पेटियों के पास दूसरी नई पेटीयां रखें उनमें एक रानी मक्खी हो तो अच्छी बात है, वरना दूसरी मधुमक्खियां स्वयं रानी मधुमक्खी बना लेती है। और फिर धीरे धीरे वो नई पेटियों में चली जाएंगी।

मधुमक्खी की पेटियों को एक से दूसरी जगह कैसे ले जाएं

भारत में कई मधुमक्खी पालक है, जो उन पेटियों एक से दूसरी जगह लेकर जाते है, ताकि अच्छी से अच्छी क्वालिटी की ओर ज्यादा शहद पा सकें। मौसम भी इसकी वजह हो सकता है, यदि आप भी पेटियों को एक से दूसरी जगह ले जाना चाहते है, तो ध्यान रहे छत्तों में ज्यादा शहद ना हो और अगर हो तो पहले निकल लें। जहां ले जाना है वह जगह पहले ही सुनिश्चित करलें। पेटी का जो प्रवेश द्वार है जहां से मधुमक्खियां अंदर आती है वहां पर लोहे की जाली लगादें ताकि वो बाहर भाग ना सके। पेटियों को गाड़ी में लंबाई की दिशा में रखें और ध्यान रहे उनको कम से कम झटके लगे ताकि कोई नुकसान न पहुंच सके। गर्मी के समय स्थानांतरण करना पड़े तो पेटियों के उपर बार बार पानी छिड़कते रहें और यदि हो सके तो रात को यात्रा करें।

मधुमक्खी पालन में आने वाली समस्याएं और उसका समाधान

मधुमक्खी पालन में मुख्य समस्याएं इसलिए आ सकती है, क्योंकि मधुमक्खियां समूह में रहने वाला जीव है, और यदि किसी एक मक्खी में कोई बीमारी होती है तो वो पूरे समूह में फेल सकती है, और बहुत हानि हो सकती है, तो हमें इनको बीमारियों से बचाना होगा। अगर किसी मक्खी में कुछ बीमारी या संक्रमण दिखे तो उसे बाकी मक्खियों से अलग कर देना चाहिए, यदि पेटी में बहुत ज्यादा संक्रमित मक्खियां हो गई है, वहां से रानी मक्खी को हटा देना चाहिए, और बहुत लंबे समय बाद जब वो ठीक हो जाए तब रानी मक्खी देना चाहिए। चिटियों से बचाने के लिए एक कटोरी पानी में केरोसिन डालके रख देना चाहिए, जिससे चीटियां पास ना जाए।

मधुमक्खी पालन करने से अन्य होने वाले लाभ

मधुमक्खी पालन में शहद से साथ साथ मोम भी मिलता है, और यह भी बाजार में बिकता है। और मधुमक्खियों के पालन से खेती में भी बहुत लाभ होता है, जब यह मक्खियां अपने छत्ते से बाहर निकलती है, और पेड़ों पोधौं से रस लेती है। फसल में परागण होता है, जिसकी वजह से बीज बनता है। यह मधुमक्खियां परागण में काफी सहायक होती है, जब यह एक फूल से दूसरे फूल पर बैठती है, तब pollen grains जो फुलों मे होता है, वो एक फुल से दुसरे फुल मे चला जाता है, यानि कि नर फूल से मादा फूल में जिससे परागण होता है, और फसल का उत्पादन कई गुना बड़ जाता है।

मधुमक्खी पालन कैसे सीखें?

मधुमक्खी पालन सीखने का सबसे अच्छा तरीका तो ये है कि अगर आपके किसी जान पहचान वाले के या आपके नजदीक कोई मधुमक्खी पालन का व्यवसाय हो, तो वहां जाकर सीख लें। यदि आपके पास ऐसी व्यवस्था नहीं है, तो आप सरकारी प्रशिक्षण ले सकते हैं। मधुमक्खी पालन के बिजनेस को सरकार भी प्रोत्साहन देती है। इसके लिए आपको लोन तो मिलता ही है और आप चार से पांच हजार के शुल्क में आराम से मधुमक्खी पालन की ट्रेनिंग कर सकते हैं। ऐसा करने के बाद आपके लिए मधुमक्खी पालन करना काफी सरल हो जाएगा।

मधुमक्खी पालन में लगने वाली लागत

आप इस व्यवसाय को केवल 20 पेटी या फिर उससे भी कम पेटी में शुरू कर सकते हो, जिसमें लगभग 1 लाख तक का खर्च आएगा, उसके बाद हर साल मधुमक्खियों की संख्या लगभग तीन गुना बड़ जाती है, यानि पहले साल जो 20 पेटियां थी, एक साल के अंदर उससे 50 से 60 पेटियां इतनी मधुमक्खियां प्राप्त हो जाती है। बाद में वो बड़ती ही जाती है।

कहां पर बेचें, और कितना होगा मुनाफा

एक पेटी में से करीब 4 से 5 किलो शहद निकल सकती है, मतलब आप 20 पेटियों में से करीब 100 किलो तक शहद एक बार में निकाल पाएंगे। बेचने की बात है तो बाजार में शहद 100 से 150 रुपए किलो आसानी से बिक जाती है। या फिर आप गांव में भी आसानी से बेच सकते है, या फिर किसी कंपनी को बेच सकते है जो पैकिंग करके ब्रांडिंग करके बेचते है। इस तरह आप करीब 20 पेटियों में से लगभग 10 से 15 हजार रूपए महीने कि कमाई कर सकते है। इतना ही नही हर महीने मधुमक्खियां बड़ती जाती है, जिससे हर महीने आपका मुनाफा भी बढ़ता ही जाएगा।

उत्पाद को कहां बेचना होगा-Where to sell Honey

जब आप अपने शहद को अच्छी तरह से तैयार कर देते हैं, उसके बाद आपको उसे बेचना होता है। आजकल शहरों में शुद्ध शहद की कमी है, यदि आप चाहें तो अपने शहद को अच्छी पैकिंग करके शहरों में ज्यादातर बेच सकते हो। इसके अलावा आप जो भी हाॅस्पिटल होते हैं उनके मेडिकल आदि पर अपने प्रोडक्ट के लिए बात कर सकते हैं, क्योंकि मेडिकल पर भी शहद दवा के रूप में सेल होता है।

इसके अलावा आप ओनलाइन मार्केट में अपनी कम्पनी का एक स्टोर बनाकर ओनलाइन मार्केटिंग के द्वारा अपने प्रोडक्ट को कई मात्रा में बेच सकते हो। आप अपने जान पहचान वाले लोगों से सम्पर्क करके उन्हें सीधे ही शहद बेच सकते हैं। इसके साथ ही यदि कोई चाहता है कि वो आपके प्रोडक्ट को खरीदके अपनी एक कम्पनी बनाकर बेचे तो आप उससे डील कर सकते हैं। ऐसा करने से आपके उत्पाद का एक पर्मानेंट ग्राहक बन

मधुमक्खी पालन में कुछ धयान देने वाली बाते 

मधुमक्खी पालन में सफल होने के लिए मधुमक्खी पालक भाई कुछ बताओ का पूरा ख्याल रखे

1) मधुमक्खी पालन करने के लिए सही समाये का निर्णय करे आप कब करे मधुमक्खी पालन की शुरुवात यह सब कुछ सोच समझ के करे

2) मधुमक्खी पालन के लिए सही प्रजाति का चुनाव करना जरूरी होता है इसका ध्यान रखे

3) मधुमक्खी के छत्ते से शहद निकलने के लिए सब से सटीक समाये का चयन करे अक्सर इसी में लोग न समझी कर बैठते है और जल्दी बजी दिखाते है शहद निकलने में और इसी करण उन्हें व्यापार में ज्यादा लाभ नहीं हो पाता

4) शहद निकालने से पहले यह बात जरूर ध्यान में रखे की मधुमक्खी के छत्ते में मधुमक्खी यह उनके अंडे नहीं हो तभी आप शहद निकाले

5) मधुमक्खी के छत्ते से बहुत ही सावधानी के साथ ही शहद निकाले अगर आपको शहद निकालने की जानकारी नहीं हैं तो आप मधुमक्खी पालक की मदद से शहद निकलवा सकते है

6) जिस जगह आप मधुमक्खी पालन कर रहे है वो जगह साफ़ और स्वच्छ होना जरूरी है क्युकी कई तरह के कीड़े मकोड़े से मधुमक्खियों को अधिक नुकसान हो सकता है

7) मधुमक्खियों को रोग से बचाने के लिए आप पानी में शक्कर मिलाकर दे इनसे मधुमक्खियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी रहती है

मधुमक्खी पालन व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए सरकार दुवारा वेबसाइट जारी किया गया है इस वेबसाइट के ज़रिया आप मधुमक्खी प्रशिक्षण केन्द्र का address हासिल कर सकते है और मधुमक्खी पालन training यहाँ से ले सकते हैं   www.kvic.org.in/

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