10वीं के बाद Commerce लेने के फायदे | Commerce lene ke fayde

जानिए दसवीं के बाद काॅमर्स लेने के क्या क्या फायदे है सम्पूर्ण जानकारी (Benefits of Commerce Stream)

हर विद्यार्थी दसवी कक्षा पास करने के बाद यह सोचने मे व्यर्थ रहता की कक्षा 10 के बाद कौनसा विषय सही रहता है। कक्षा 10 के बाद आप Arts (Hummenity), वाणिज्य (Commerce), व विज्ञान (Science) इत्यादी विषयो का चुनाव कर सकते है। कक्षा 10 के बाद आपको वाणिज्य या काॅमर्स क्यो लेनी चाहिए इस विषय के बार मे हम चर्चा करेंगे। तो आप इस लेख को पुरा अंत तक पढे ताकि आपको इस विषय के बारे मे पूरा समझ आ सके।

क्या है काॅमर्स विषय? (What is commerce subject)

काॅमर्स एक ऐसा विषय है जिसके बारे में काफी लोगों के मन मे काफी सारे विचार रहते है। वाणिज्य विषय का मुल आधार हिसाब व रोजगार मे फायदेमंद के आसार पर जाना जाता है। इस विषय को पढने के बाद आप आसानी से किसी भी व्यवसाय, कम्पनी व दूकान की बैलेंस शीट, व बाजार के उतार चढाव को समझ सकते है। काॅमर्स विषय को चूनने या पढने से पहले खुद को एक प्रश्न पूछे की क्या आप इस विषय को पढने मे Intersted है?

काॅमर्स विषय के चुनाव से पहले कुछ मुख्य बिन्दू जिसको जानना आपके लिए जरूरी है।

  1. क्या आपका व्यवसायीक विषय गणित को समझने की अच्छी क्षमता है।
  2. क्या आप किसी विषय को अच्छे से विश्लेषण कर सकते है।
  3. क्या आपको व्यापार सम्बंधित ज्ञान है या उसे पढने व समझने मे कौशल रखते है।
  4. क्या आप त्रुटि रहित काम को करना पसंद करते है।
  5. क्या आप गणित के आंकड़ों को पढ़ने, समझने व उनके साथ खेलने का हूनर रख सकते है।

10वीं के बाद काॅमर्स (Commerce after 10th)

अगर आप कक्षा 10th के बाद कॉमर्स लेने की सोच रहे है तो आपके लिए यह एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। इस विषय को आप आसानी से पढ व समझ सकते है। यह विषय थ्योरिकल से ज्यादा पे्रक्ट्रिल है। इस विषय मे पढने से कम समझने की जरूरत है। काॅमर्स एक व्यवहारिक विषय है साथ ही इस विषय को पढने के बाद एक सामान्य सा विद्यार्थी भी व्यापारिक विषय को आसानी से समझ सकते है।

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काॅमर्स के विषय ( Commerce Subject)

काॅमर्स मे कई तरह के विषयो को पढ सकते है।

Business Economics (बिजनेस इकोनॉमिक्स) : इस विषय में आप व्यवसाय से जुड़ी Law of Supply and demand और व इकोनॉमिक्स इत्यादी प्रकार के तत्वों के बारे मे पढ सकते है।

Cost Accounting (कॉस्ट अकाउंटिंग) : इस विषय में आप कॉन्ट्रैक्ट सम्बंधित तथ्य के बारे मे पढे़गे और साथ बजत कंट्रोल से जुडी जानकारियो के बारे मे पढ़ेंगे।

Auditing (एडिटिंग) : कॉमर्स के इस विषय में आप ऑडिट से जुडी जानकारी के बारे मे पढ सकते है। इसमे आप कंपनी या किसी व्यवसाय से जुडी ट्रांजेक्शन, आय – व्यय के बारे मे Audit के बारे मे पढ़ व समझ सकते है।

Financial Accounting (फाइनैंशल एकाउंटिंग) – इस विषय में आप मुख्य रूप से कंपनी या व्यवसाय के फंड से सम्बंधित कार्य कर सकते है।

Business Finance (बिजनेस फाइनेंस) : कॉमर्स के इस विषय में आप व्यवसाय के एनालाइजर से सम्बंधित कार्य कर सकते है

Income Tax (इनकम टैक्स) : इस विषय में आप इनकम टैक्स से सम्बंधित कार्य को कर सकते है व उसका विशलेषण भी कर सकते है।

Management (मैनेजमेंट) : इस विषय में आप प्रबन्धन से जुड़े कार्य से संबंधित सीखते हैं

COMMERCE के बाद स्कोप

आप अगर काॅमर्स पढने से पहले इसके स्काॅप को देखना चाहते है तो आप यहा देख सकते हे।

CA : अगर आपको भविष्य में चार्टर्ड अकाउंटेंट बनना है तो आपको कॉमर्स विषय पढना चाहिए क्योंकि इस विषय मे व्यापार व व्यवसाय के बारे मे बताया जाता है साथ ही लेखांकन के बारे मे भी। कॉमर्स में लेखांकन और वित्तीय व्यवहार के बारे मे बताया व पढाया जाता है तो आप अगर खुद को भविष्य मे एक चार्टेड एकाउंटेंड देखना चाहते है तो आप इस विषय को पढना चाहिए।

CS : CS का यह सीधा सा मतलब Company Secretary से है जो की आप कोमर्स के बाद कर सकते है। एक कंपनी सेकेट्री कम्पनी का अधिकारी होता है जो कंपनी मे एक मैनेजर के तौर पर कार्य करता है साथ ही वह कंपनी मे होने वाले कार्यो पर निगरानी भी रख सकता है।

Banking : अगर आप भविष्य में बैंकिंग सेवा में जाना चाहते है तो आप 10वीं कक्षा के बाद काॅमर्स पढ़ सकते है। काॅमर्स विषय मे आपको लेखांकन के बारे मे बताया जाता है और बैंकिंग कार्य में भी ज्यादातर कार्य लेखांकन से संबंधित ही होता है।

Chartered Financial Analyst Program : अगर आपको आंकड़ों के साथ खेलना पसंद है तो आप भी इस फिल्ड मे आ सकते है परन्तु इसके लिए आपको लेखांकन और वित्तीय व्यवहार का ज्ञान होना भी जरूरी है इसलिए आप कोसर्म पढ़ कर इस फिल्ड मे आ सकते है।

Investment banking : बीकॉम के बाद CFA certificate कोर्स कर सकते है जिससे आप एक इन्वेस्टमेंट बैंकर के रूप में अपनी पहचान बना सकते हैं जिसका काम वित्तीय संचालन और निवेश का होता है।

Accountant अकाउंटेंट : एमकॉम में अकाउंट को मुख्य विषय में ले सकते हैं और आप अकाउंटेंट, फाइनेंशियल डायरेक्टर, चीफ ऑडिटर,चीफ अकाउंटेंट में अपने आपको स्थापित कर सकते हैं।

Digital Marketing : आज के समय सारे काम ऑनलाइन हो रहे है व्यापार इंटरनेट पर आगया है तो ऐसे समय में डिजिटल मार्केटिंग में अपना करियर बनाना एक श्रेष्ठ विकल्प है। डिजिटल मार्केटिंग में किसी भी उत्पाद का प्रचार, विज्ञापन,ब्रांडिंग,बेचना और खरीदना अपनी कुर्सी पर बैठकर कंप्यूटर या मोबाइल से कर सकते हैं और कॉमर्स में इसके बारे में विशेष कर पढ़ाया जाता है।

COMMERCE के बाद किये जाने वाले कोर्सेज

अगर आपने कक्षा 10 से 12 तक काॅमर्स पढी है ओर आगे काॅलेजे के लिए यह सोच रह है की कोर्मस के बाद कौनसा कोर्स करना उचित रहता है तो आप इन कोर्सेज को देख सकते है।

B.COM : अगर आपने कक्षा 10th मे कोमर्स पढी है तो आप कक्षा 12th के बाद B.COM का कोर्स भी कर सकते है। यह एक ग्रेजुएट कोर्स है जो कि 3 साल का होता है।

BMS : इसे Bachelor of Management Studies कोर्स का पूरा नाम है। यह एक Management डिग्री होती है।

BE : Bachelor of economies की यह डिग्री भी 3 साल की होती है जो गेजुएट लेवल की होती है। इसमे कोर्स मे आप फाइनेंनस फन्डामेंटल के बारे मे सीखते है।

BACHELOR OF COMMERCE IN BANKING & INSURANCE : इस तीन साल के कोर्स मे आपको बैंकिंग सेक्टर से जुडी जानकारियां दी जाती है। यह भी 3 साल की डिग्री होती है जो ग्रेजुएट लेवल की होती है।

BCA : Bachelor of computer application यह एक तीन साल का कंप्यूटर कोर्स होता है जो आप कोमर्स के बाद कर सकते है यह भी एक प्रकार के गे्रजुएट की डिग्री होती है।

जर्नलिज्म या मास कम्युनिकेशन : अगर कोई कॉमर्स स्ट्रीम से है और मीडिया और नेटवर्किंग में रुचि रखता है तो वो जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में स्नातक कर सकता है और प्रेस और मीडिया में साउंड इंजीनियर,न्यूज एंकर, पब्लिक रिलेशन ऑफिसर, टीवी कार्यक्रम, आरजे, साउंड क्वालिटी की नौकरी कर सकता है और प्रेस और डिजिटल मीडिया के लिए कंटेंट भी बना सकता है। साथ ही जर्नलिस्ट और एडिटर की जॉब भी कर सकता है।

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COMMERCE विषय को क्यो चुने?

दसवी के बाद कोमर्स को चुनने के कारण

  1. काॅमर्स आज के समय में लगभग हर प्रकार के व्यवसाय मे काम मे आती है। काॅमर्स को पढ कर आप इससे कुछ ऐसे फंडामेंटल सिख सकते है जिसका उपयोग आप अपने व्यवसाय मे कर अपना समय बचा सकते है।
  2. यह विषय आपके रोज के काम आने वाली समस्याओं को हल करने के बारे में सिखाता है जैसे जैसे बही खाता,प्रतिबंधन और बाजार के उतार चढाव, ये एक ऐसा प्रैक्टिकल विषय है जिसकी जरूरत आपको रोजमर्रा की जिंदगी में पढ़ती है
  3.  कॉमर्स लेने वाला व्यक्ति दूसरों के मुकाबले में काफी बेहतर ढंग से बजट प्रतिबंध को समझता है
  4. आजकल कोई भी व्यक्ती इनवेस्ट करने का ज्ञान रखता है मगर एक कॉमर्स वाला व्यक्ती जानता है कि पैसों को कहां इनवेस्ट करें जिससे उसे बढ़कर पैसे मिले जैसे mutual funds, FD aur शेयर बाजार में पैसा लगाता है तो उसे ज्यादा मुनाफा मिलेगा क्युकि कॉमर्स विषय के अंतर्गत पढ़ाया जाता है
  5. इस विषय के लिए आपको महंगी कोचिंग नहीं करनी होती है
  6. Develop business mind इससे खुद का व्यावसाय खोलने की समझ आ जाती है अगर कोई आगे चलकर अपना बिजनेस खोलना चाहता है तो यह सहायक विषय साबित हो

Commerce विषय चुनने के अवगुण

सभी स्ट्रीम में कुछ न कुछ खामियां भी होती हैं ऐसे ही कॉमर्स में भी कुछ खामियां हैं जो कि निम्न हैं

  1. टैक्स, मैनेजमेंट स्किल्स, व्यापार हमेशा बदलता रहता है अगर कोई अपडेट नहीं रहोगे तो इस व्यासाय में बढ़ना मुश्किल है।
  2. इसके लिए आपको मैथमेटिक्स की समझ होना जरूरी है
  3. कॉमर्स लेने के बाद विज्ञान स्ट्रीम में नही जा सकते हैं जबकि साइंस के विद्यार्थी कॉमर्स में अपना करियर बना सकते है 

निष्कर्ष

इस लेख में हमने 10वी कक्षा के बाद कॉमर्स का चुनाव क्यो करें और किस उदृेश्य से करें। उम्मीद करते है आपको यह लेख पसंद आया होगा और कोई जानकारी ओर लेनी है तो आप कमेंट कर सकते है।

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